ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · अर्जुन विषाद योग

श्लोक 18

अर्जुन विषाद योग · Arjuna Vishada Yoga

मूल पाठ

द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते | सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे राजन्! श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी तथा धृष्टद्युम्न एवं राजा विराट और अजेय सात्यकि, राजा द्रुपद और द्रौपदी के पाँचों पुत्र तथा लम्बी-लम्बी भुजाओंवाले सुभद्रा-पुत्र अभिमन्यु - इन सभी ने सब ओर से अलग-अलग (अपने-अपने) शंख बजाये।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे राजन्! श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी तथा धृष्टद्युम्न एवं राजा विराट और अजेय सात्यकि, राजा द्रुपद और द्रौपदी के पाँचों पुत्र तथा लम्बी-लम्बी भुजाओंवाले सुभद्रा-पुत्र अभिमन्यु - इन सभी ने सब ओर से अलग-अलग (अपने-अपने) शंख बजाये।

English Meaning

Drupada and the sons of Draupadi, O Lord of the earth, and the son of Subhadra, the mighty-armed, blew their conches separately.

Drupada and the sons of Draupadi, O Lord of the earth, and the son of Subhadra, the mighty-armed, blew their conches separately.

आगे पढ़ें — अर्जुन विषाद योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता