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श्रीमद्भगवद्गीता · विभूति योग

श्लोक 2

विभूति योग · Vibhuti Yoga

मूल पाठ

न मे विदुः सुरगणाः प्रभवं न महर्षयः | अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वशः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मेरे प्रकट होनेको न देवता जानते हैं और न महर्षि; क्योंकि मैं सब प्रकारसे देवताओं और महर्षियोंका आदि हूँ।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

मेरे प्रकट होनेको न देवता जानते हैं और न महर्षि; क्योंकि मैं सब प्रकारसे देवताओं और महर्षियोंका आदि हूँ।

English Meaning

Neither the hosts of the gods nor the great sages know My origin; for in every way I am the source of all the gods and the great sages.

Neither the hosts of the gods nor the great sages know My origin; for in every way I am the source of all the gods and the great sages.

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