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श्रीमद्भगवद्गीता · विभूति योग

श्लोक 5

विभूति योग · Vibhuti Yoga

मूल पाठ

अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽयशः | भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधाः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

बुद्धि, ज्ञान, असम्मोह, क्षमा, सत्य, दम, शम, सुख, दुःख, भव, अभाव, भय, अभय, अहिंसा, समता, तुष्टि, तप, दान, यश और अपयश -- प्राणियोंके ये अनेक प्रकारके और अलग-अलग (बीस) भाव मेरेसे ही होते हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

बुद्धि, ज्ञान, असम्मोह, क्षमा, सत्य, दम, शम, सुख, दुःख, भव, अभाव, भय, अभय, अहिंसा, समता, तुष्टि, तप, दान, यश और अपयश -- प्राणियोंके ये अनेक प्रकारके और अलग-अलग (बीस) भाव मेरेसे ही होते हैं।

English Meaning

Non-injury, equanimity, contentment, austerity, beneficence, fame, ill-fame (these) different kinds of qualities of beings arise from Me alone.

Non-injury, equanimity, contentment, austerity, beneficence, fame, ill-fame (these) different kinds of qualities of beings arise from Me alone.

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