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श्रीमद्भगवद्गीता · विभूति योग

श्लोक 4

विभूति योग · Vibhuti Yoga

मूल पाठ

बुद्धिर्ज्ञानमसंमोहः क्षमा सत्यं दमः शमः | सुखं दुःखं भवोऽभावो भयं चाभयमेव च

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

बुद्धि, ज्ञान, असम्मोह, क्षमा, सत्य, दम, शम, सुख, दुःख, भव, अभाव, भय, अभय, अहिंसा, समता, तुष्टि, तप, दान, यश और अपयश -- प्राणियोंके ये अनेक प्रकारके और अलग-अलग (बीस) भाव मेरेसे ही होते हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

बुद्धि, ज्ञान, असम्मोह, क्षमा, सत्य, दम, शम, सुख, दुःख, भव, अभाव, भय, अभय, अहिंसा, समता, तुष्टि, तप, दान, यश और अपयश -- प्राणियोंके ये अनेक प्रकारके और अलग-अलग (बीस) भाव मेरेसे ही होते हैं।

English Meaning

Intellect, wisdom, non-delusion, forgiveness, truth, self-restraint, calmness, happiness, pain, existence or birth, non-existence or death, fear and also fearlessness.

Intellect, wisdom, non-delusion, forgiveness, truth, self-restraint, calmness, happiness, pain, existence or birth, non-existence or death, fear and also fearlessness.

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