अर्जुन उवाच | मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम् | यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम
अर्थ: अर्जुन बोले -- केवल मेरेपर कृपा करनेके लिये ही आपने जो परम गोपनीय अध्यात्मतत्तव जाननेका वचन कहा, उससे मेरा यह मोह नष्ट हो गया है।
विश्वरूप दर्शन योग · Vishwarupa Darshana Yoga
किरीटिनं गदिनं चक्रिणं च तेजोराशिं सर्वतोदीप्तिमन्तम् | पश्यामि त्वां दुर्निरीक्ष्यं समन्ता द्दीप्तानलार्कद्युतिमप्रमेयम्
मैं आपको किरीट, गदा, चक्र (तथा शङ्ख और पद्म) धारण किये हुए देख रहा हूँ। आपको तेजकी राशि, सब ओर प्रकाश करनेवाले, देदीप्यमान अग्नि तथा सूर्यके समान कान्तिवाले, नेत्रोंके द्वारा कठिनतासे देखे जानेयोग्य और सब तरफसे अप्रमेयस्वरूप देख रहा हूँ।
मैं आपको किरीट, गदा, चक्र (तथा शङ्ख और पद्म) धारण किये हुए देख रहा हूँ। आपको तेजकी राशि, सब ओर प्रकाश करनेवाले, देदीप्यमान अग्नि तथा सूर्यके समान कान्तिवाले, नेत्रोंके द्वारा कठिनतासे देखे जानेयोग्य और सब तरफसे अप्रमेयस्वरूप देख रहा हूँ।
I see Thee with the diadem, the club and the discus, a mass of radiance shining everywhere, very hard to look at, blazing all round like burning fire and the sun, and immeasurable.
I see Thee with the diadem, the club and the discus, a mass of radiance shining everywhere, very hard to look at, blazing all round like burning fire and the sun, and immeasurable.
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