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श्रीमद्भगवद्गीता · विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 6

विश्वरूप दर्शन योग · Vishwarupa Darshana Yoga

मूल पाठ

पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्िवनौ मरुतस्तथा | बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याऽश्चर्याणि भारत

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे भरतवंशोद्भव अर्जुन! तू बारह आदित्योंको, आठ वसुओंको, ग्यारह रुद्रोंको और दो अश्विनीकुमारोंको तथा उनचास मरुद्गणोंको देख। जिनको तूने पहले कभी देखा नहीं, ऐसे बहुत-से आश्चर्यजनक रूपोंको भी तू देख।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे भरतवंशोद्भव अर्जुन! तू बारह आदित्योंको, आठ वसुओंको, ग्यारह रुद्रोंको और दो अश्विनीकुमारोंको तथा उनचास मरुद्गणोंको देख। जिनको तूने पहले कभी देखा नहीं, ऐसे बहुत-से आश्चर्यजनक रूपोंको भी तू देख।

English Meaning

Behold the Adityas, the Vasus, the Rudras, the two Asvins and also the Maruts; behold many wonders never seen before, O Arjuna.

Behold the Adityas, the Vasus, the Rudras, the two Asvins and also the Maruts; behold many wonders never seen before, O Arjuna.

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