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श्रीमद्भगवद्गीता · विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 40

विश्वरूप दर्शन योग · Vishwarupa Darshana Yoga

मूल पाठ

नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व | अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे सर्व ! आपको आगेसे भी नमस्कार हो ! पीछेसे भी नमस्कार हो ! सब ओरसे ही नमस्कार हो ! हे अनन्तवीर्य ! अमित विक्रमवाले आपने सबको समावृत कर रखा है; अतः सब कुछ आप ही हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे सर्व ! आपको आगेसे भी नमस्कार हो ! पीछेसे भी नमस्कार हो ! सब ओरसे ही नमस्कार हो ! हे अनन्तवीर्य ! अमित विक्रमवाले आपने सबको समावृत कर रखा है; अतः सब कुछ आप ही हैं।

English Meaning

Salutations to Thee, in front and behind! Salutations to Thee on every side! O All!! Thou infinite in power and prowess, pervadest all; wherefore Thou art all.

Salutations to Thee, in front and behind! Salutations to Thee on every side! O All!! Thou infinite in power and prowess, pervadest all; wherefore Thou art all.

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