ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 24

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग · Kshetra Kshetrajna Vibhaga Yoga

मूल पाठ

य एवं वेत्ति पुरुषं प्रकृतिं च गुणैः सह | सर्वथा वर्तमानोऽपि न स भूयोऽभिजायते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इस प्रकार पुरुषको और गुणोंके सहित प्रकृतिको जो मनुष्य अलग-अलग जानता है, वह सब तरहका बर्ताव करता हुआ भी फिर जन्म नहीं लेता।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

इस प्रकार पुरुषको और गुणोंके सहित प्रकृतिको जो मनुष्य अलग-अलग जानता है, वह सब तरहका बर्ताव करता हुआ भी फिर जन्म नहीं लेता।

English Meaning

He who thus knows the Spirit and Matter together with the qualities, in whatever condition he may be, he is not born again.

He who thus knows the Spirit and Matter together with the qualities, in whatever condition he may be, he is not born again.

आगे पढ़ें — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता