अर्जुन उवाच | प्रकृतिं पुरुषं चैव क्षेत्रं क्षेत्रज्ञमेव च | एतद्वेदितुमिच्छामि ज्ञानं ज्ञेयं च केशव
अर्थ: No Translation
क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग · Kshetra Kshetrajna Vibhaga Yoga
ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना | अन्ये सांख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे
कई मनुष्य ध्यानयोगके द्वारा, कई सांख्ययोगके द्वारा और कई कर्मयोगके द्वारा अपने-आपसे अपने-आपमें परमात्मतत्त्वका अनुभव करते हैं।
कई मनुष्य ध्यानयोगके द्वारा, कई सांख्ययोगके द्वारा और कई कर्मयोगके द्वारा अपने-आपसे अपने-आपमें परमात्मतत्त्वका अनुभव करते हैं।
Some by meditation behold the Self in the self by the self, others by the Yoga of knowledge, and still others by the Yoga of action.
Some by meditation behold the Self in the self by the self, others by the Yoga of knowledge, and still others by the Yoga of action.
आगे पढ़ें — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता