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श्रीमद्भगवद्गीता · पुरुषोत्तम योग

श्लोक 1

पुरुषोत्तम योग · Purushottama Yoga

मूल पाठ

श्री भगवानुवाच | ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम् | छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रीभगवान् बोले -- ऊपरकी ओर मूलवाले तथा नीचेकी ओर शाखावाले जिस संसाररूप अश्वत्थवृक्षको अव्यय कहते हैं और वेद जिसके पत्ते हैं, उस संसारवृक्षको जो जानता है, वह सम्पूर्ण वेदोंको जाननेवाला है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

श्रीभगवान् बोले -- ऊपरकी ओर मूलवाले तथा नीचेकी ओर शाखावाले जिस संसाररूप अश्वत्थवृक्षको अव्यय कहते हैं और वेद जिसके पत्ते हैं, उस संसारवृक्षको जो जानता है, वह सम्पूर्ण वेदोंको जाननेवाला है।

English Meaning

The Blessed Lord said They (the wise) speak of the indestructible peepul tree having its root above and branches below, whose leaves are the metres or hymns: he who knows it is a knower of the Vedas.

The Blessed Lord said They (the wise) speak of the indestructible peepul tree having its root above and branches below, whose leaves are the metres or hymns: he who knows it is a knower of the Vedas.

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