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श्रीमद्भगवद्गीता · पुरुषोत्तम योग

श्लोक 7

पुरुषोत्तम योग · Purushottama Yoga

मूल पाठ

ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः | मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इस संसारमें जीव बना हुआ आत्मा मेरा ही सनातन अंश है; परन्तु वह प्रकृतिमें स्थित मन और पाँचों इन्द्रियोंको आकर्षित करता है (अपना मान लेता है)।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

इस संसारमें जीव बना हुआ आत्मा मेरा ही सनातन अंश है; परन्तु वह प्रकृतिमें स्थित मन और पाँचों इन्द्रियोंको आकर्षित करता है (अपना मान लेता है)।

English Meaning

An eternal portion of Myself having become a living soul in the world of life, draws to (itself) the (five) senses with the mind for the sixth, abiding in Nature.

An eternal portion of Myself having become a living soul in the world of life, draws to (itself) the (five) senses with the mind for the sixth, abiding in Nature.

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