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श्रीमद्भगवद्गीता · पुरुषोत्तम योग

श्लोक 19

पुरुषोत्तम योग · Purushottama Yoga

मूल पाठ

यो मामेवमसम्मूढो जानाति पुरुषोत्तमम् | स सर्वविद्भजति मां सर्वभावेन भारत

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे भरतवंशी अर्जुन ! इस प्रकार जो मोहरहित मनुष्य मुझे पुरुषोत्तम जानता है, वह सर्वज्ञ सब प्रकारसे मेरा ही भजन करता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे भरतवंशी अर्जुन ! इस प्रकार जो मोहरहित मनुष्य मुझे पुरुषोत्तम जानता है, वह सर्वज्ञ सब प्रकारसे मेरा ही भजन करता है।

English Meaning

He who, undeluded, knows Me thus as the highest Purusha, he, knowing all, worships Me with his whole being (heart), O Arjuna.

He who, undeluded, knows Me thus as the highest Purusha, he, knowing all, worships Me with his whole being (heart), O Arjuna.

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