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श्रीमद्भगवद्गीता · सांख्य योग

श्लोक 67

सांख्य योग · Sankhya Yoga

मूल पाठ

इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते | तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अपने-अपने विषयोंमें विचरती हुई इन्द्रियोंमेंसे एक ही इन्द्रिय जिस मनको अपना अनुगामी बना लेती है, वह अकेला मन जलमें नौकाको वायुकी तरह इसकी बुद्धिको हर लेता है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अपने-अपने विषयोंमें विचरती हुई इन्द्रियोंमेंसे एक ही इन्द्रिय जिस मनको अपना अनुगामी बना लेती है, वह अकेला मन जलमें नौकाको वायुकी तरह इसकी बुद्धिको हर लेता है।

English Meaning

For the mind, which follows in the wake of the wandering senses, carries away his discrimination, as the wind (carries away) a boat on the waters.

For the mind, which follows in the wake of the wandering senses, carries away his discrimination, as the wind (carries away) a boat on the waters.

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