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श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म योग

श्लोक 14

कर्म योग · Karma Yoga

मूल पाठ

अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवः | यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सम्पूर्ण प्राणी अन्नसे उत्पन्न होते हैं। अन्न वर्षासे होती है। वर्षा यज्ञसे होती है। यज्ञ कर्मोंसे निष्पन्न होता है। कर्मोंको तू वेदसे उत्पन्न जान और वेदको अक्षरब्रह्मसे प्रकट हुआ जान। इसलिये वह सर्वव्यापी परमात्मा यज्ञ (कर्तव्य-कर्म) में नित्य प्रतिष्ठित है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

सम्पूर्ण प्राणी अन्नसे उत्पन्न होते हैं। अन्न वर्षासे होती है। वर्षा यज्ञसे होती है। यज्ञ कर्मोंसे निष्पन्न होता है। कर्मोंको तू वेदसे उत्पन्न जान और वेदको अक्षरब्रह्मसे प्रकट हुआ जान। इसलिये वह सर्वव्यापी परमात्मा यज्ञ (कर्तव्य-कर्म) में नित्य प्रतिष्ठित है।

English Meaning

From food come forth beings; from rain food is produced; from sacrifice arises rain and sacrifice is born of action.

From food come forth beings; from rain food is produced; from sacrifice arises rain and sacrifice is born of action.

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