ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म योग

श्लोक 29

कर्म योग · Karma Yoga

मूल पाठ

प्रकृतेर्गुणसम्मूढाः सज्जन्ते गुणकर्मसु | तानकृत्स्नविदो मन्दान्कृत्स्नविन्न विचालयेत्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

प्रकृतिजन्य गुणोंसे अत्यन्त मोहित हुए अज्ञानी मनुष्य गुणों और कर्मोंमें आसक्त रहते हैं। उन पूर्णतया न समझनेवाले मन्दबुद्धि अज्ञानियोंको पूर्णतया जाननेवाला ज्ञानी मनुष्य विचलित न करे।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

प्रकृतिजन्य गुणोंसे अत्यन्त मोहित हुए अज्ञानी मनुष्य गुणों और कर्मोंमें आसक्त रहते हैं। उन पूर्णतया न समझनेवाले मन्दबुद्धि अज्ञानियोंको पूर्णतया जाननेवाला ज्ञानी मनुष्य विचलित न करे।

English Meaning

Those deluded by the qualities of Nature are attached to the functions of the qualities. The man of perfect knowledge should not unsettle the foolish one who is of imperfect knowledge.

Those deluded by the qualities of Nature are attached to the functions of the qualities. The man of perfect knowledge should not unsettle the foolish one who is of imperfect knowledge.

आगे पढ़ें — कर्म योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता