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श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म योग

श्लोक 33

कर्म योग · Karma Yoga

मूल पाठ

सदृशं चेष्टते स्वस्याः प्रकृतेर्ज्ञानवानपि | प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सम्पूर्ण प्राणी प्रकृतिको प्राप्त होते हैं। ज्ञानी महापुरुष भी अपनी प्रकृतिके अनुसार चेष्टा करता है। फिर इसमें किसीका हठ क्या करेगा?

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

सम्पूर्ण प्राणी प्रकृतिको प्राप्त होते हैं। ज्ञानी महापुरुष भी अपनी प्रकृतिके अनुसार चेष्टा करता है। फिर इसमें किसीका हठ क्या करेगा?

English Meaning

Even a wise man acts in accordance with his own nature; beings will follow Nature; what can restraint do?

Even a wise man acts in accordance with his own nature; beings will follow Nature; what can restraint do?

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