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श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म योग

श्लोक 35

कर्म योग · Karma Yoga

मूल पाठ

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् | स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अच्छी तरह आचरणमें लाये हुए दूसरेके धर्मसे गुणोंकी कमीवाला अपना धर्म श्रेष्ठ है। अपने धर्ममें तो मरना भी कल्याणकारक है और दूसरेका धर्म भयको देनेवाला है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अच्छी तरह आचरणमें लाये हुए दूसरेके धर्मसे गुणोंकी कमीवाला अपना धर्म श्रेष्ठ है। अपने धर्ममें तो मरना भी कल्याणकारक है और दूसरेका धर्म भयको देनेवाला है।

English Meaning

Better is one's own duty, though devoid of merit than the duty of another well discharged. Better is death in one's own duty; the duty of another is fraught with fear (is productive of danger).

Better is one's own duty, though devoid of merit than the duty of another well discharged. Better is death in one's own duty; the duty of another is fraught with fear (is productive of danger).

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