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श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म योग

श्लोक 40

कर्म योग · Karma Yoga

मूल पाठ

इन्द्रियाणि मनो बुद्धिरस्याधिष्ठानमुच्यते | एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि इस कामके वास-स्थान कहे गये हैं। यह काम इन- (इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि-) के द्वारा ज्ञानको ढककर देहाभिमानी मनुष्यको मोहित करता है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि इस कामके वास-स्थान कहे गये हैं। यह काम इन- (इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि-) के द्वारा ज्ञानको ढककर देहाभिमानी मनुष्यको मोहित करता है।

English Meaning

The senses, the mind and the intellect are said to be its seat; through these it deludes the embodied by veiling his wisdom.

The senses, the mind and the intellect are said to be its seat; through these it deludes the embodied by veiling his wisdom.

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