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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 13

ज्ञान कर्म संन्यास योग · Jnana Karma Sanyasa Yoga

मूल पाठ

चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः | तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मेरे द्वारा गुणों और कर्मोंके विभागपूर्वक चारों वर्णोंकी रचना की गयी है। उस-(सृष्टि-रचना आदि-) का कर्ता होनेपर भी मुझ अव्यय रमेश्वरको तू अकर्ता जान। कारण कि कर्मोंके फलमें मेरी स्पृहा नहीं है, इसलिये मुझे कर्म लिप्त नहीं करते। इस प्रकार जो मुझे तत्त्वसे जान लेता है, वह भी कर्मोंसे नहीं बँधता।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

मेरे द्वारा गुणों और कर्मोंके विभागपूर्वक चारों वर्णोंकी रचना की गयी है। उस-(सृष्टि-रचना आदि-) का कर्ता होनेपर भी मुझ अव्यय रमेश्वरको तू अकर्ता जान। कारण कि कर्मोंके फलमें मेरी स्पृहा नहीं है, इसलिये मुझे कर्म लिप्त नहीं करते। इस प्रकार जो मुझे तत्त्वसे जान लेता है, वह भी कर्मोंसे नहीं बँधता।

English Meaning

The fourfold caste has been created by Me according to the differentiation of Guna and Karma; though I am the author thereof know Me as non-doer and immutable.

The fourfold caste has been created by Me according to the differentiation of Guna and Karma; though I am the author thereof know Me as non-doer and immutable.

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