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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 9

ज्ञान कर्म संन्यास योग · Jnana Karma Sanyasa Yoga

मूल पाठ

जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः | त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे अर्जुन! मेरे जन्म और कर्म दिव्य हैं। इस प्रकार (मेरे जन्म और कर्मको) जो मनुष्य तत्त्वसे जान लेता अर्थात् दृढ़तापूर्वक मान लेता है, वह शरीरका त्याग करके पुनर्जन्मको प्राप्त नहीं होता, प्रत्युत मुझे प्राप्त होता है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे अर्जुन! मेरे जन्म और कर्म दिव्य हैं। इस प्रकार (मेरे जन्म और कर्मको) जो मनुष्य तत्त्वसे जान लेता अर्थात् दृढ़तापूर्वक मान लेता है, वह शरीरका त्याग करके पुनर्जन्मको प्राप्त नहीं होता, प्रत्युत मुझे प्राप्त होता है।

English Meaning

He who thus knows, in their true light, My divine birth and action, having abandoned the body, is not born again, he comes to Me, O Arjuna.

He who thus knows, in their true light, My divine birth and action, having abandoned the body, is not born again, he comes to Me, O Arjuna.

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