ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 2

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

यं संन्यासमिति प्राहुर्योगं तं विद्धि पाण्डव | न ह्यसंन्यस्तसङ्कल्पो योगी भवति कश्चन

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे अर्जुन! लोग जिसको संन्यास कहते हैं, उसीको तुम योग समझो; क्योंकि संकल्पोंका त्याग किये बिना मनुष्य कोई-सा भी योगी नहीं हो सकता।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे अर्जुन! लोग जिसको संन्यास कहते हैं, उसीको तुम योग समझो; क्योंकि संकल्पोंका त्याग किये बिना मनुष्य कोई-सा भी योगी नहीं हो सकता।

English Meaning

Do thou, O Arjuna, know Yoga to be that which they call renunciation; no one verily becomes a Yogi who has not renounced thoughts.

Do thou, O Arjuna, know Yoga to be that which they call renunciation; no one verily becomes a Yogi who has not renounced thoughts.

आगे पढ़ें — आत्म संयम योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता