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श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 4

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जते | सर्वसङ्कल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिस समय न इन्द्रियोंके भोगोंमें तथा न कर्मोंमें ही आसक्त होता है, उस समय वह सम्पूर्ण संकल्पोंका त्यागी मनुष्य योगारूढ़ कहा जाता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जिस समय न इन्द्रियोंके भोगोंमें तथा न कर्मोंमें ही आसक्त होता है, उस समय वह सम्पूर्ण संकल्पोंका त्यागी मनुष्य योगारूढ़ कहा जाता है।

English Meaning

When a man is not attached to the sense-objects or to actions, having renounced all thoughts, then he is said to have attained to Yoga.

When a man is not attached to the sense-objects or to actions, having renounced all thoughts, then he is said to have attained to Yoga.

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