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श्रीमद्भगवद्गीता · अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 18

अक्षर ब्रह्म योग · Akshara Brahma Yoga

मूल पाठ

अव्यक्ताद्व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे | रात्र्यागमे प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसंज्ञके

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

ब्रह्माजीके दिनके आरम्भकालमें अव्यक्त- (ब्रह्माजीके सूक्ष्म-शरीर-) से सम्पूर्ण प्राणी पैदा होते हैं और ब्रह्माजीकी रातके आरम्भकालमें उसी अव्यक्तमें सम्पूर्ण प्राणी लीन हो जाते हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

ब्रह्माजीके दिनके आरम्भकालमें अव्यक्त- (ब्रह्माजीके सूक्ष्म-शरीर-) से सम्पूर्ण प्राणी पैदा होते हैं और ब्रह्माजीकी रातके आरम्भकालमें उसी अव्यक्तमें सम्पूर्ण प्राणी लीन हो जाते हैं।

English Meaning

From the Unmanifested all the manifested (worlds) proceed at the coming of the 'day'; at the coming of the 'night' they dissolve verily into ï1thatï1 alone which is called the Unmanifested.

From the Unmanifested all the manifested (worlds) proceed at the coming of the 'day'; at the coming of the 'night' they dissolve verily into ï1thatï1 alone which is called the Unmanifested.

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