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श्रीमद्भगवद्गीता · अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 21

अक्षर ब्रह्म योग · Akshara Brahma Yoga

मूल पाठ

अव्यक्तोऽक्षर इत्युक्तस्तमाहुः परमां गतिम् | यं प्राप्य न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उसीको अव्यक्त और अक्षर कहा गया है और उसीको परमगति कहा गया है तथा जिसको प्राप्त होनेपर जीव फिर लौटकर नहीं आते, वह मेरा परमधाम है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

उसीको अव्यक्त और अक्षर कहा गया है और उसीको परमगति कहा गया है तथा जिसको प्राप्त होनेपर जीव फिर लौटकर नहीं आते, वह मेरा परमधाम है।

English Meaning

What is called the Unmanifested and the Imperishable, That they say is the highest goal. They who reach It do not return (to this Samsara). That is My highest abode (place or state).

What is called the Unmanifested and the Imperishable, That they say is the highest goal. They who reach It do not return (to this Samsara). That is My highest abode (place or state).

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