ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 24

अक्षर ब्रह्म योग · Akshara Brahma Yoga

मूल पाठ

अग्निर्ज्योतिरहः शुक्लः षण्मासा उत्तरायणम् | तत्र प्रयाता गच्छन्ति ब्रह्म ब्रह्मविदो जनाः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिस मार्गमें प्रकाशस्वरूप अग्निका अधिपति देवता, दिनका अधिपति देवता, शुक्लपक्षका अधिपति देवता, और छः महीनोंवाले उत्तरायणका अधिपति देवता है, शरीर छोड़कर उस मार्गसे गये हुए ब्रह्मवेत्ता पुरुष (पहले ब्रह्मलोकको प्राप्त होकर पीछे ब्रह्माजीके साथ) ब्रह्मको प्राप्त हो जाते हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जिस मार्गमें प्रकाशस्वरूप अग्निका अधिपति देवता, दिनका अधिपति देवता, शुक्लपक्षका अधिपति देवता, और छः महीनोंवाले उत्तरायणका अधिपति देवता है, शरीर छोड़कर उस मार्गसे गये हुए ब्रह्मवेत्ता पुरुष (पहले ब्रह्मलोकको प्राप्त होकर पीछे ब्रह्माजीके साथ) ब्रह्मको प्राप्त हो जाते हैं।

English Meaning

Fire, light daytime, the bright fortnight, the six months of the northern path of the sun (the northern solstice) departing then (by these) men who know Brahman go to Brahman.

Fire, light daytime, the bright fortnight, the six months of the northern path of the sun (the northern solstice) departing then (by these) men who know Brahman go to Brahman.

आगे पढ़ें — अक्षर ब्रह्म योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता