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श्रीमद्भगवद्गीता · अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 9

अक्षर ब्रह्म योग · Akshara Brahma Yoga

मूल पाठ

कविं पुराणमनुशासितार मणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः | सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूप मादित्यवर्णं तमसः परस्तात्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो सर्वज्ञ, पुराण, शासन करनेवाला, सूक्ष्म-से-सूक्ष्म, सबका धारण-पोषण करनेवाला, अज्ञानसे अत्यन्त परे, सूर्यकी तरह प्रकाशस्वरूप -- ऐसे अचिन्त्य स्वरूपका चिन्तन करता है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जो सर्वज्ञ, पुराण, शासन करनेवाला, सूक्ष्म-से-सूक्ष्म, सबका धारण-पोषण करनेवाला, अज्ञानसे अत्यन्त परे, सूर्यकी तरह प्रकाशस्वरूप -- ऐसे अचिन्त्य स्वरूपका चिन्तन करता है।

English Meaning

Whosoever meditates on the Omniscient, the Ancient, the Ruler (of the whole world), minuter than an atom, the supporter of all, of inconceivable form, effulgent like the sun and beyond the darkness of ignorance.

Whosoever meditates on the Omniscient, the Ancient, the Ruler (of the whole world), minuter than an atom, the supporter of all, of inconceivable form, effulgent like the sun and beyond the darkness of ignorance.

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