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श्रीमद्भगवद्गीता · राजविद्या राजगुह्य योग

श्लोक 1

राजविद्या राजगुह्य योग · Rajavidya Rajaguhya Yoga

मूल पाठ

श्री भगवानुवाच | इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे | ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रीभगवान् बोले -- यह अत्यन्त गोपनीय विज्ञानसहित ज्ञान दोषदृष्टिरहित तेरे लिये तो मैं फिर अच्छी तरहसे कहूँगा, जिसको जानकर तू अशुभसे अर्थात् जन्म-मरणरूप संसारसे मुक्त हो जायगा।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

श्रीभगवान् बोले -- यह अत्यन्त गोपनीय विज्ञानसहित ज्ञान दोषदृष्टिरहित तेरे लिये तो मैं फिर अच्छी तरहसे कहूँगा, जिसको जानकर तू अशुभसे अर्थात् जन्म-मरणरूप संसारसे मुक्त हो जायगा।

English Meaning

The Blessed Lord said I shall now declare to thee who does not cavil, the greatest secret, the knowledge combined with experience (Self-realisation). Having known this thou shalt be free evil.

The Blessed Lord said I shall now declare to thee who does not cavil, the greatest secret, the knowledge combined with experience (Self-realisation). Having known this thou shalt be free evil.

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