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श्रीमद्भगवद्गीता · राजविद्या राजगुह्य योग

श्लोक 7

राजविद्या राजगुह्य योग · Rajavidya Rajaguhya Yoga

मूल पाठ

सर्वभूतानि कौन्तेय प्रकृतिं यान्ति मामिकाम् | कल्पक्षये पुनस्तानि कल्पादौ विसृजाम्यहम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे कुन्तीनन्दन ! कल्पोंका क्षय होनेपर सम्पूर्ण प्राणी मेरी प्रकृतिको प्राप्त होते हैं और कल्पोंके आदिमें मैं फिर उनकी रचना करता हूँ।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे कुन्तीनन्दन ! कल्पोंका क्षय होनेपर सम्पूर्ण प्राणी मेरी प्रकृतिको प्राप्त होते हैं और कल्पोंके आदिमें मैं फिर उनकी रचना करता हूँ।

English Meaning

All beings, O Arjuna, go into My Nature at the end of a Kalpa; I send them forth again at the beginning of (the next) Kalpa.

All beings, O Arjuna, go into My Nature at the end of a Kalpa; I send them forth again at the beginning of (the next) Kalpa.

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