ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · राजविद्या राजगुह्य योग

श्लोक 14

राजविद्या राजगुह्य योग · Rajavidya Rajaguhya Yoga

मूल पाठ

सततं कीर्तयन्तो मां यतन्तश्च दृढव्रताः | नमस्यन्तश्च मां भक्त्या नित्ययुक्ता उपासते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

नित्य- (मेरेमें) युक्त मनुष्य दृढ़व्रती होकर लगनपूर्वक साधनमें लगे हुए और भक्तिपूर्वक कीर्तन करते हुए तथा नमस्कार करते हुये निरन्तर मेरी उपासना करते हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

नित्य- (मेरेमें) युक्त मनुष्य दृढ़व्रती होकर लगनपूर्वक साधनमें लगे हुए और भक्तिपूर्वक कीर्तन करते हुए तथा नमस्कार करते हुये निरन्तर मेरी उपासना करते हैं।

English Meaning

Always glorifying Me, striving,firm in vows, prostrating themselves before Me, they worship Me with devotion always steadfast.

Always glorifying Me, striving,firm in vows, prostrating themselves before Me, they worship Me with devotion always steadfast.

आगे पढ़ें — राजविद्या राजगुह्य योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता