ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · राजविद्या राजगुह्य योग

श्लोक 26

राजविद्या राजगुह्य योग · Rajavidya Rajaguhya Yoga

मूल पाठ

पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति | तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो भक्त पत्र, पुष्प, फल, जल आदि (यथासाध्य प्राप्त वस्तु) को भक्तिपूर्वक मेरे अर्पण करता है, उस मेरेमें तल्लीन हुए अन्तःकरणवाले भक्तके द्वारा भक्तिपूर्वक दिये हुए उपहार-(भेंट-) को मैं खा लेता हूँ।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जो भक्त पत्र, पुष्प, फल, जल आदि (यथासाध्य प्राप्त वस्तु) को भक्तिपूर्वक मेरे अर्पण करता है, उस मेरेमें तल्लीन हुए अन्तःकरणवाले भक्तके द्वारा भक्तिपूर्वक दिये हुए उपहार-(भेंट-) को मैं खा लेता हूँ।

English Meaning

Whoever offers Me with devotion a leaf, a flower, a fruit or a little water that, so offered devotedly by the pure-minded, I accept.

Whoever offers Me with devotion a leaf, a flower, a fruit or a little water that, so offered devotedly by the pure-minded, I accept.

आगे पढ़ें — राजविद्या राजगुह्य योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता