ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
भाग 1

श्रीलिङ्गमहापुराणपूर्वभाग

कुल 108 अध्याय

अध्याय 1

देवर्षि नारदजीका नैमिषारण्य-आगमन, श्रीसूत-शौनक-संवादमें लिङ्गमहापुराणका उपक्रम

3 मिनट का पाठ497 शब्द
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अध्याय 2

लिङ्गपुराणका परिचय तथा इसमें प्रतिपादित विषयोंका वर्णन

6 मिनट का पाठ1,051 शब्द
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अध्याय 3

अलिङ्ग एवं लिङ्गतत्त्वका स्वरूप, शिवतत्त्वकी व्यापकता, महदादि तत्त्वोंका विवेचन, जगत्की उत्पत्तिका क्रम तथा महेश्वर शिवकी महिमा

5 मिनट का पाठ908 शब्द
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अध्याय 4

ब्रह्माजीकी आयुका परिमाण, कालका स्वरूप, कल्प, मन्वन्तर एवं युगादिका मान तथा ब्रह्माजीद्वारा विभिन्न लोकोंकी संरचना

6 मिनट का पाठ1,141 शब्द
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अध्याय 5

ब्रह्माजीद्वारा पंचपर्वा अविद्याकी सृष्टि, नौ प्रकारकी सृष्टि (नवविध सर्ग)-की संरचना, मरीचि आदि ऋषियोंकी उत्पत्ति, मनु-शतरूपाका प्रादुर्भाव तथा दक्षप्रजापतिकी कन्याओंका वंशवर्णन

6 मिनट का पाठ1,026 शब्द
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अध्याय 6

अग्नि तथा पितरोंके वंशका वर्णन, ब्रह्माजीसे रुद्रोंका प्रादुर्भाव, परमेष्ठी सदाशिवकी महिमा

4 मिनट का पाठ727 शब्द
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अध्याय 7

माहेश्वरयोगका प्रतिपादन, अट्ठाईस व्यासों तथा चौदह मनुओंकी नामावली, माहेश्वरयोगावतारोंका वर्णन

5 मिनट का पाठ848 शब्द
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अध्याय 8

शरीरमें स्थित योगस्थानोंका वर्णन, योगका स्वरूप, अष्टांगयोगका वर्णन, विषयभोगोंकी निस्सारता, प्राणायामकी महिमा, सदाशिवके ध्यानका स्वरूप

13 मिनट का पाठ2,441 शब्द
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अध्याय 9

योगसाधनमें उत्पन्न होनेवाली विघ्नरूप विभिन्न सिद्धियाँ तथा वैराग्यसे पाशुपतयोगकी प्राप्ति

7 मिनट का पाठ1,366 शब्द
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अध्याय 10

योगसिद्धिप्राप्त पुरुषोंके लक्षण, साधुधर्मका स्वरूप, भगवान् शिवके साक्षात्कारके उपायोंका वर्णन तथा भक्तिभावमें श्रद्धाकी महत्ता

7 मिनट का पाठ1,252 शब्द
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अध्याय 11

श्वेतलोहितकल्पमें शिवस्वरूप भगवान् सद्योजातका प्रादुर्भाव तथा उनकी महिमा

2 मिनट का पाठ205 शब्द
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अध्याय 12

रक्तकल्पमें शिवस्वरूप भगवान् वामदेवका प्रादुर्भाव तथा उनकी महिमा

2 मिनट का पाठ276 शब्द
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अध्याय 13

पीतवासाकल्पमें शिवस्वरूप भगवान् तत्पुरुषका प्रादुर्भाव तथा उनका माहात्म्य

2 मिनट का पाठ396 शब्द
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अध्याय 14

असितकल्पमें शिवस्वरूप भगवान् अघोरका प्राकट्य और उनका माहात्म्य

2 मिनट का पाठ237 शब्द
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अध्याय 15

अघोरेशमाहात्म्य तथा अघोरमन्त्रके जपसे विविध पातकोंका विनाश

4 मिनट का पाठ693 शब्द
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अध्याय 16

विश्वरूप नामक कल्पमें शिवस्वरूप भगवान् ईशानका प्रादुर्भाव, ब्रह्माजीद्वारा ईशानकी स्तुति

4 मिनट का पाठ776 शब्द
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अध्याय 17

ब्रह्मा तथा विष्णुके समक्ष ज्योतिर्मय महालिङ्गका प्राकट्य, ब्रह्म और विष्णुद्वारा हंस एवं वाराहरूप धारणकर लिङ्गके मूलस्थानका अन्वेषण, लिङ्गमध्यसे शब्दमय उमा-महेश्वरका प्रादुर्भाव और ईशानादि पाँच शिवरूपोंकी उत्पत्ति

10 मिनट का पाठ1,875 शब्द
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अध्याय 18

विष्णुद्वारा की गयी भगवान् महेश्वरकी स्तुति तथा उसका माहात्म्य

4 मिनट का पाठ738 शब्द
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अध्याय 19

महादेवजीद्वारा ब्रह्मा एवं विष्णुको वर प्रदान करना तथा उमामहेश्वर-पूजनके रूपमें लिङ्गपूजनकी परम्पराका प्रारम्भ

2 मिनट का पाठ370 शब्द
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अध्याय 20

शेषशय्यापर आसीन भगवान् विष्णुके नाभिकमलसे ब्रह्माजीका प्रादुर्भाव, भगवान् शिवकी मायासे दोनोंका विमोहित होना, विष्णुद्वारा ब्रह्माके प्रति शिवमाहात्म्यका कथन

10 मिनट का पाठ1,922 शब्द
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अध्याय 21

ब्रह्मा तथा विष्णुद्वारा की गयी भगवान् महेश्वरकी स्तुति एवं उसका माहात्म्य

9 मिनट का पाठ1,665 शब्द
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अध्याय 22

महादेवजीद्वारा विष्णु और ब्रह्माको वरदान, सृष्टिके लिये ब्रह्माजीद्वारा तप करना तथा सर्पों एवं रुद्रोंकी सृष्टि

3 मिनट का पाठ584 शब्द
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अध्याय 23

विभिन्न कल्पोंमें होनेवाले सद्योजातादि शिवावतारोंका वर्णन, विभिन्न लोकोंकी स्थिति तथा महारुद्रका विश्वरूपत्व

5 मिनट का पाठ989 शब्द
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अध्याय 24

श्वेतवाराहकल्पके अट्ठाईस द्वापरोंके अन्तमें प्रकट होनेवाले अट्ठाईस व्यासों, अट्ठाईस शिवावतारों तथा विविध शिवयोगियोंका वर्णन

12 मिनट का पाठ2,369 शब्द
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अध्याय 25

लिङ्गार्चनविधिके अन्तर्गत शरीर एवं मनकी शुद्धिके लिये अन्तः एवं बाह्य स्नानकी प्रक्रिया और विविध मन्त्रोंसे आत्माभिषेचन

3 मिनट का पाठ586 शब्द
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अध्याय 26

भगवती गायत्रीका आवाहन तथा जप, सूर्यकी प्रार्थना, सूर्यसूक्तोंका पाठ, देव-ऋषि-पितृतर्पण, पंचमहायज्ञोंका अनुष्ठान, भस्मस्नान एवं मन्त्रस्नान

4 मिनट का पाठ751 शब्द
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अध्याय 27

लिङ्गार्चनविधिके अन्तर्गत महेश्वरस्वरूप होकर विविध उपचारोंद्वारा लिङ्गपूजाका विधान, लिङ्गाभिषेककी महिमा तथा अभिषेकके मन्त्र

5 मिनट का पाठ931 शब्द
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अध्याय 28

भगवान् महेश्वरके आभ्यन्तरपूजनका स्वरूप, सकल तथा निष्कल तत्त्वकी व्याख्या, छब्बीस तत्त्वोंका परिगणन एवं सम्पूर्ण चराचर जगत्की शिवरूपता

5 मिनट का पाठ818 शब्द
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अध्याय 29

देवदारुवनका वृत्तान्त, अतिथिमाहात्म्यमें सुदर्शनमुनिका आख्यान तथा संन्यासधर्मका वर्णन

8 मिनट का पाठ1,564 शब्द
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अध्याय 30

शिवाराधनाके माहात्म्यमें श्वेतमुनिका आख्यान

5 मिनट का पाठ814 शब्द
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अध्याय 31

देवदारुवननिवासी मुनिगणोंद्वारा शिवाराधना

5 मिनट का पाठ919 शब्द
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अध्याय 32

मुनियोंद्वारा की गयी शिवस्तुति

2 मिनट का पाठ312 शब्द
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अध्याय 33

मुनियोंको शिवभक्तिका उपदेश

3 मिनट का पाठ506 शब्द
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अध्याय 34

भगवान् शिवद्वारा भस्म, भस्मस्नान एवं शिवयोगियोंकी महिमाका प्रतिपादन

4 मिनट का पाठ679 शब्द
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अध्याय 35

महर्षि दधीच एवं राजा क्षुपकी कथा तथा महामृत्युंजयमन्त्रकी स्वरूपमीमांसा

4 मिनट का पाठ648 शब्द
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अध्याय 36

राजा क्षुपद्वारा विष्णुकी आराधना, विष्णुद्वारा शिवभक्तोंकी महिमाका कथन

9 मिनट का पाठ1,631 शब्द
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अध्याय 37

नन्दीके जन्मका वृत्तान्त, ब्रह्मा तथा विष्णुका परस्पर संवाद और शिवद्वारा दोनोंपर अनुग्रह करना

4 मिनट का पाठ765 शब्द
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अध्याय 38

विष्णुद्वारा महेश्वरके माहात्म्यका कथन तथा नारायणद्वारा सृष्टिका वर्णन

2 मिनट का पाठ290 शब्द
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अध्याय 39

सत्ययुग, त्रेतायुग तथा द्वापरयुगका वर्णन, द्वापरमें वेदसंहिताके विभाजनका एवं कल्पभेदसे विविध पुराणोंके अनुक्रमका वर्णन

8 मिनट का पाठ1,487 शब्द
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अध्याय 40

कलियुगके धर्मोंका वर्णन, कलियुगमें धर्म आदिका हास तथा स्वल्प भी धर्माचरणका महत्फल एवं कलियुगके अन्तमें पुनः सत्ययुगकी प्रवृत्ति

10 मिनट का पाठ1,946 शब्द
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अध्याय 41

विभिन्न कल्पोंमें त्रिदेवोंका परस्पर प्राकट्य तथा ब्रह्माद्वारा महेश्वरकी नामाष्टकस्तुतिका वर्णन

6 मिनट का पाठ1,181 शब्द
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अध्याय 42

शिलादद्वारा तप करनेसे भगवान् महेश्वरका नन्दी नामसे उनके पुत्रके रूपमें प्रकट होना और शिलादद्वारा नन्दिकेश्वर शिवकी स्तुति

4 मिनट का पाठ792 शब्द
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अध्याय 43

शिलादद्वारा पुत्र नन्दिकेश्वरको वेदादिकी शिक्षा प्रदान करना, ऋषियोंद्वारा नन्दिकेश्वरकी आयु अल्प बतानेपर शिलादका दुःखी होना तथा नन्दिकेश्वरद्वारा त्र्यम्बकमन्त्रका जप एवं महेश्वर-पार्वतीद्वारा उन्हें अपने पुत्ररूपमें अमर होनेका वरदान देना

5 मिनट का पाठ980 शब्द
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अध्याय 44

भगवान् शिवद्वारा नन्दिकेश्वरको गणोंके अधिपतिके रूपमें प्रतिष्ठित करना एवं सभी देवोंके द्वारा नन्दिकेश्वरका अभिषेक तथा शिवनाममन्त्रकी महिमा

5 मिनट का पाठ907 शब्द
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अध्याय 45

भगवान् रुद्रके विराट् स्वरूप तथा सात पाताललोकोंका वर्णन

2 मिनट का पाठ392 शब्द
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अध्याय 46

भुवनसन्निवेशमें सात द्वीपों तथा सात समुद्रोंका वर्णन एवं सर्वत्र भगवान् शिवकी व्यापकता, स्वायम्भुव मन्वन्तरके प्रियव्रतादि राजवंशोंका वर्णन, जम्बूद्वीप, कुशद्वीप तथा क्रौंचद्वीपके राजाओंका वर्णन

5 मिनट का पाठ820 शब्द
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अध्याय 47

जम्बूद्वीपके अधिपति प्रियव्रतके पुत्र महाराज आग्नीध्रका वंशवर्णन तथा आग्नीध्रके शिवभक्त नौ पुत्रोंका अजनाभवर्ष (भारतवर्ष), किम्पुरुषवर्ष आदि नौ वर्षों (देशों)-का स्वामी बनना

3 मिनट का पाठ464 शब्द
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अध्याय 48

भूमध्यमें स्थित मेरु (सुमेरु) पर्वत और इन्द्र आदि लोकपालोंकी पुरियोंका वर्णन

4 मिनट का पाठ680 शब्द
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अध्याय 49

जम्बूद्वीपका विस्तृत वर्णन, वहाँके कुलपर्वतों, नदियों, वनों तथा वहाँ रहनेवाले लोगोंका वर्णन

6 मिनट का पाठ1,187 शब्द
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अध्याय 50

भुवनविन्यासमें विभिन्न कुलाचल पर्वतोंपर रहनेवाली देवयोनियों आदिका वर्णन

2 मिनट का पाठ329 शब्द
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अध्याय 51

दिव्य भूतवनमें महादेवके निवासस्थानका वर्णन, कैलास तथा वहाँकी पवित्र नदियोंका वर्णन

3 मिनट का पाठ510 शब्द
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अध्याय 52

विभिन्न द्वीपोंकी नदियोंका वर्णन, केतुमाल, कुरुवर्ष, भारतवर्ष, किम्पुरुष आदि वर्षोंमें रहनेवाले लोगों तथा उनकी लोकवृत्तिका वर्णन

5 मिनट का पाठ953 शब्द
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अध्याय 53

भुवनकोशवर्णनमें प्लक्ष, शाल्मलि, क्रौंचद्वीपोंके महापर्वतों, ऊर्ध्वलोकों तथा नरकोंका वर्णन, सर्वत्र सदाशिवकी व्यापकता एवं यक्षरूप शिव और भगवती उमाका माहात्म्य

6 मिनट का पाठ1,152 शब्द
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अध्याय 54

ज्योतिःसन्निवेशवर्णनमें लोकपालोंकी पुरियोंका वर्णन, सूर्यकी स्थिति तथा उसकी गतिसे होनेवाले अयन एवं ऋतुओंकी स्थिति, ध्रुवस्थान तथा मेघोंका स्वरूप और वृष्टिका प्रादुर्भाव

7 मिनट का पाठ1,388 शब्द
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अध्याय 55

शिवस्वरूप भगवान् सूर्यके रथ तथा चैत्रादि बारह मासोंमें रथके साथ भ्रमण करनेवाले देवता, मुनि, नाग, गन्धर्व आदिका वर्णन

8 मिनट का पाठ1,441 शब्द
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अध्याय 56

सोम (चन्द्रमा)-की स्थिति एवं गतिका निरूपण, चन्द्रकलाओंके हास तथा वृद्धिका वर्णन

2 मिनट का पाठ345 शब्द
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अध्याय 57

बुध आदि ग्रहोंके रथोंका स्वरूप, ग्रह-नक्षत्रों एवं तारागणोंद्वारा ध्रुवका परिभ्रमण, ग्रहोंका स्वरूप-विस्तार तथा उनकी गतिका निरूपण

4 मिनट का पाठ743 शब्द
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अध्याय 58

ब्रह्माद्वारा शिवके आदेशसे ग्रहों, नक्षत्रों, जलों आदिके अधिपतिके रूपमें सूर्य, चन्द्रमा, वरुण आदिकी प्रतिष्ठाका निरूपण

2 मिनट का पाठ293 शब्द
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अध्याय 59

पार्थिव, शुचि तथा वैद्युत नामसे अग्निके तीन रूपोंका वर्णन, बारह मासके बारह सूर्योंका नामनिर्देश एवं सूर्यरश्मियोंका वर्णन

5 मिनट का पाठ915 शब्द
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अध्याय 60

मंगल, बुध, बृहस्पति, शनि आदि ग्रहों एवं सूर्यके माहात्म्यका वर्णन

3 मिनट का पाठ510 शब्द
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अध्याय 61

ज्योतिःसन्निवेशमें ग्रहोंके स्वरूप तथा नक्षत्रों और ग्रहोंकी पारस्परिक स्थितिका वर्णन

6 मिनट का पाठ1,127 शब्द
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अध्याय 62

उत्तानपादके पुत्र ध्रुवका आख्यान, ध्रुवकी तपस्या तथा ध्रुवलोकसंस्थानका वर्णन

5 मिनट का पाठ873 शब्द
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अध्याय 63

दक्षप्रजापतिद्वारा मैथुनी सृष्टिका प्रादुर्भाव, दक्षकन्याओंकी वंश-परम्परा तथा ऋषिवंशवर्णन

8 मिनट का पाठ1,565 शब्द
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अध्याय 64

वसिष्ठपुत्र शक्तिका आख्यान तथा महर्षि पराशरकी कथा

12 मिनट का पाठ2,354 शब्द
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अध्याय 65

सूर्यवंश तथा चन्द्रवंशका वर्णन एवं शिवभक्त तण्डीप्रोक्त रुद्रसहस्त्रनाम

11 मिनट का पाठ2,116 शब्द
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अध्याय 66

इक्ष्वाकुवंशी राजाओंकी कथा तथा ययातिवंश-वर्णन

8 मिनट का पाठ1,483 शब्द
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अध्याय 67

राजर्षि ययातिका आख्यान तथा ययातिगाथा

4 मिनट का पाठ646 शब्द
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अध्याय 68

ययातिपुत्र यदुके वंशका वर्णन

5 मिनट का पाठ908 शब्द
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अध्याय 69

चन्द्रवंश-वर्णनमें भगवान् श्रीकृष्णके अवतारकी कथा तथा संक्षेपमें कृष्णचरितका वर्णन

9 मिनट का पाठ1,705 शब्द
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अध्याय 70

महेश्वरसे होनेवाली आदिसृष्टिका स्वरूप, नवविधसर्गवर्णन एवं प्राजापत्यसर्गनिरूपण तथा भगवती सतीकी देहसे अनेक देवियोंका प्रादुर्भाव

34 मिनट का पाठ6,618 शब्द
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अध्याय 71

तारकासुरके पुत्रों--विद्युन्माली, तारकाक्ष तथा कमलाक्षका वृत्तान्त एवं तपस्याद्वारा इन्हें कामचारी तीन पुरोंकी प्राप्ति, त्रिपुरासुरके विनाशके लिये देवताओंका उद्योग तथा भगवान् शंकरका उनपर अनुग्रह

16 मिनट का पाठ3,120 शब्द
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अध्याय 72

त्रिपुरासुरके वधके लिये विश्वकर्माद्वारा एक दिव्य रथका निर्माण तथा भगवान् महेश्वरका उस रथपर आरूढ़ हो त्रिपुरासुरको दग्ध करना एवं ब्रह्माद्वारा भगवान् शिवकी स्तुति

19 मिनट का पाठ3,723 शब्द
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अध्याय 73

लिङ्गार्चनकी विधि तथा उसकी महिमा

3 मिनट का पाठ538 शब्द
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अध्याय 74

ब्रह्माकी आज्ञासे विश्वकर्माद्वारा विभिन्न लिङ्गोंका निर्माण करके देवताओंको प्रदान करना एवं देवताओंद्वारा उन-उन लिङ्गोंका पूजन, लिङ्गके विविध भेद तथा उनकी स्थापनाका माहात्म्य

4 मिनट का पाठ603 शब्द
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अध्याय 75

शिवके निर्गुण एवं सगुणस्वरूपका निरूपण

5 मिनट का पाठ886 शब्द
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अध्याय 76

विविध शिवस्वरूपोंकी प्रतिष्ठा एवं उपासनाका फल

6 मिनट का पाठ1,144 शब्द
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अध्याय 77

शिवमन्दिरोंके निर्माणका फल, शिवक्षेत्रों तथा शिवतीर्थोंके सेवनकी महिमा, शिवमन्दिरके उपलेपन आदिका माहात्म्य

10 मिनट का पाठ1,964 शब्द
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अध्याय 78

शिवाचारके परिपालनमें अहिंसाधर्मकी महिमा एवं शिवभक्तिका माहात्म्य

3 मिनट का पाठ535 शब्द
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अध्याय 79

शिवपूजासे सभीका कल्याण, शिवपूजाकी विधि एवं शिवमन्दिरमें दीपदानकी महिमा

4 मिनट का पाठ673 शब्द
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अध्याय 80

देवताओंका कैलासपुरी आकर वहाँ विराजमान उमासहित भगवान् शिवके दर्शन करना तथा भगवान् शिवद्वारा देवताओंको पाशुपतव्रतका उपदेश प्रदान करना

6 मिनट का पाठ1,063 शब्द
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अध्याय 81

विविध मासोंमें किये जानेवाले पशुपाशविमोचक लिङ्गव्रतका विधान तथा उसका माहात्म्य

6 मिनट का पाठ1,071 शब्द
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अध्याय 82

सभी पापोंका उच्छेदक तथा शिवसायुज्य प्रदान करनेवाला व्यपोहनस्तव और उसके पाठका फल

10 मिनट का पाठ1,911 शब्द
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अध्याय 83

विभिन्न मासोंमें किये जानेवाले शिवव्रतोंका विधान

6 मिनट का पाठ1,025 शब्द
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अध्याय 84

उमामहेश्वरव्रतका वर्णन तथा पूजाविधान

7 मिनट का पाठ1,361 शब्द
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अध्याय 85

पंचाक्षरीविद्या (पंचाक्षरमन्त्र), जपविधान तथा उसकी महिमा

24 मिनट का पाठ4,787 शब्द
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अध्याय 86

पाशुपतयोगज्ञानका स्वरूप तथा उसकी महिमा

16 मिनट का पाठ3,139 शब्द
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अध्याय 87

सनकादि मुनीश्वरोंको शिवज्ञानका उपदेश

3 मिनट का पाठ546 शब्द
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अध्याय 88

पाशुपतयोगसे प्राप्त होनेवाली अष्टसिद्धियोंका वर्णन तथा प्राणाग्निहोमका स्वरूप

10 मिनट का पाठ1,985 शब्द
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अध्याय 89

सदाचार तथा शौचाचारका निरूपण, द्रव्यशुद्धि, अशौचप्रवृत्ति एवं स्त्रीधर्मविवेचन

14 मिनट का पाठ2,687 शब्द
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अध्याय 90

यतियोंके लिये प्रायश्चित्तनिरूपण

3 मिनट का पाठ533 शब्द
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अध्याय 91

आसन्नमृत्युसूचक लक्षण एवं योगसाधनामें प्रणवका माहात्म्य तथा शिवोपासनानिरूपण

9 मिनट का पाठ1,625 शब्द
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अध्याय 92

अविमुक्तक्षेत्र वाराणसीका माहात्म्य तथा श्रीविश्वेश्वरपूजाविधिवर्णन

19 मिनट का पाठ3,760 शब्द
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अध्याय 93

हिरण्याक्षपुत्र अन्धकासुरका आख्यान तथा शिवानुग्रहसे उसे गाणपत्यपदकी प्राप्ति

3 मिनट का पाठ546 शब्द
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अध्याय 94

भगवान्‌के वाराहावतारकी कथा, हिरण्याक्षका वध तथा देवताओंद्वारा भगवान्‌ वाराहकी स्तुति

4 मिनट का पाठ668 शब्द
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अध्याय 95

नृसिंहावतारके सन्दर्भमें भक्त प्रह्लादकी कथा, हिरण्यकशिपुका वध, भगवान्‌ नृसिंहके उग्ररूपको देखकर देवताओंका भयभीत होकर भगवान्‌ महेश्वरकी स्तुति करना, महेश्वरके शरभावतारका प्राकट्य

7 मिनट का पाठ1,283 शब्द
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अध्याय 96

भगवान्‌ महेश्वरद्वारा वीरभद्रका आवाहन और नृसिंहके तेजको शमन करनेके लिये भेजना, वीरभद्र तथा नृसिंहका संवाद, भगवान्‌ शिवका शरभावतार धारणकर नृसिंहतेजको शान्त करना एवं नृसिंहद्वारा शिवस्तुति

13 मिनट का पाठ2,551 शब्द
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अध्याय 97

जलन्धर-वधकी कथा

5 मिनट का पाठ942 शब्द
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अध्याय 98

भगवान्‌ विष्णुद्वारा एक सहस्र नामोंसे भगवान्‌ शिवकी स्तुति करना तथा प्रसन्न होकर महेश्वरद्वारा उन्हें सुदर्शनचक्र प्रदान करना

12 मिनट का पाठ2,246 शब्द
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अध्याय 99

भगवान्‌ शिवके वामभागसे शिवाका प्रादुर्भाव तथा शिवाका दक्षपुत्री सतीके रूपमें पुनः मेनाकी कन्या पार्वतीके रूपमें प्राकट्य

2 मिनट का पाठ383 शब्द
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अध्याय 100

वीरभद्रद्वारा दक्षयज्ञभंग तथा भगवान्‌ महेश्वरका दक्षप्रजापतिपर अनुग्रह

5 मिनट का पाठ885 शब्द
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अध्याय 101

सतीका हिमवान्‌की पुत्री पार्वतीके रूपमें प्राकट्य, शिवकी प्राप्तिके लिये उनका कठोर तप, तारकासुरद्वारा देवताओंको पराजित करना, शिवद्वारा कामदेवका दहन तथा पुनः जीवित करना

5 मिनट का पाठ827 शब्द
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अध्याय 102

पार्वतीकी तपस्यासे प्रसन्न हो भगवान्‌ शिवका ब्राह्मणवेषमें आकर उन्हें वरदान देना, हिमालयद्वारा पार्वतीस्वयंवरकी घोषणा, स्वयंवरमें भगवान्‌ शिवका बालरूपमें उपस्थित होकर सभीको मोहित करना, पुनः ब्रह्माकी स्तुतिसे प्रसन्न हो महेश्वरका मनोहर वररूप धारणकर सबको आनन्दित करना

6 मिनट का पाठ1,162 शब्द
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अध्याय 103

भगवान्‌ शिव एवं पार्वतीके विवाहकी मांगलिक कथा तथा विवाहके अनन्तर भगवान्‌ शिवका काशी-आगमन और पार्वतीको मुक्तिक्षेत्र काशीकी महिमा बताना

8 मिनट का पाठ1,491 शब्द
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अध्याय 104

गजाननका प्राकट्य करानेके लिये देवताओंद्वारा भगवान्‌ शिवकी स्तुति

4 मिनट का पाठ638 शब्द
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अध्याय 105

विघ्ननाशक श्रीगणेशजीके प्राकट्यकी कथा

3 मिनट का पाठ581 शब्द
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अध्याय 106

दारुकासुरके विनाशके लिये भगवान्‌ शिवद्वारा अपने शरीरसे काली तथा अष्टभैरवोंको प्रकट करना एवं शिवताण्डवनृत्यकी कथा

4 मिनट का पाठ603 शब्द
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अध्याय 107

शिवभक्त उपमन्युकी कथा तथा उमामहेश्वरद्वारा उसपर अनुग्रह करना

7 मिनट का पाठ1,266 शब्द
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अध्याय 108

भगवान्‌ श्रीकृष्णका गुरु उपमन्युके आश्रममें जाना और उनसे पाशुपतज्ञान प्राप्त करना तथा पाशुपतव्रतका माहात्म्य

2 मिनट का पाठ367 शब्द
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