अध्याय 1
श्रीलिङ्गमहापुराण — उत्तरभाग
कुल 55 अध्याय
अध्याय 2
भगवद्गुणगानका माहात्म्य
अध्याय 3
भगवान् श्रीकृष्णकी कृपासे श्रीनारदजीको गानबन्धु, जाम्बवती आदिसे गानविद्याकी प्राप्ति
अध्याय 4
वासुदेवपरायण विष्णुभक्तोंके लक्षण तथा उनकी महिमा
अध्याय 5
विष्णुभक्त राजर्षि अम्बरीषका आख्यान, विष्णुमायाद्वारा नारद एवं पर्वत मुनिका वानरमुख होना तथा इसीका रामावतारमें हेतु बनना
अध्याय 6
भगवान् विष्णुसे अलक्ष्मी (ज्येष्ठा-दरिद्रा) तथा लक्ष्मीका प्रादुर्भाव एवं लक्ष्मी तथा दरिद्राके निवासयोग्य स्थानोंका वर्णन
अध्याय 7
भगवान् विष्णुके अष्टाक्षर तथा द्वादशाक्षर मन्त्रजपकी महिमामें ऐतरेय ब्राह्मणकी कथा
अध्याय 8
शिवमहामन्त्रके जपसे ब्राह्मणपुत्र दुराचारी धुन्धुमूकका शिवकी कृपासे शिवगणत्वको प्राप्त करना
अध्याय 9
पशु, पाश एवं पशुपतिकी व्याख्या, पाशुपतयोगका माहात्म्य तथा पशुपाशमोक्षविवरण
अध्याय 10
उमापति शिवके माहात्म्यका वर्णन तथा शिवके आदेशसे ही सृष्टि-पालन आदि सभी कार्योंका संचालन
अध्याय 11
भगवान् शिव तथा देवी पार्वतीकी विभूतियोंका वर्णन एवं लिङ्गपूजनका माहात्म्य
अध्याय 12
भगवान् शिवकी अष्टमूर्तियोंका स्वरूप तथा उनकी विश्वरूपता
अध्याय 13
भगवान् सदाशिवके शर्व, भव आदि आठ स्वरूपों तथा उनकी शक्तियों एवं पुत्रोंका वर्णन
अध्याय 14
भगवान् महेश्वरके पंचब्रह्मात्मक ईशान, तत्पुरुष आदि स्वरूपोंका वर्णन
अध्याय 15
शिवमाहात्म्यका वर्णन
अध्याय 16
विविध नाम-रूपोंमें शिवकी आराधनाकी महिमा
अध्याय 17
भगवान् शिवद्वारा देवताओंसे अपने यथार्थ स्वरूपका कथन
अध्याय 18
देवताओंद्वारा भगवान् महेश्वरकी स्तुति
अध्याय 19
देवताओं तथा मुनियोंको सूर्यमण्डलमें उमासहित नीललोहित पंचमुख सदाशिवके विराट्स्वरूपका दर्शन होना और उनकी पूजा एवं स्तुति करना
अध्याय 20
पाशुपतयोग एवं शैवी दीक्षाका वर्णन तथा शिवयोगकी महिमा
अध्याय 21
शिवदीक्षाविधि-वर्णन एवं शिवार्चनका माहात्म्य
अध्याय 22
शिवदीक्षा-प्रकरणमें सौरस्नानविधि तथा भास्करार्चाका वर्णन
अध्याय 23
हृदयदेशमें भगवान् शिवकी मानसपूजा एवं न्यासयोगका वर्णन
अध्याय 24
न्यास एवं तत्त्वशुद्धिपूर्वक विविध उपचारोंसे भगवान् सदाशिवका पूजन और शिवार्चाका माहात्म्य
अध्याय 25
शिवहोमाके लिये कुण्ड-मेखला-निर्माण, अरणिमन्थन, पात्रासादन, आज्यसंस्कार, अग्निसंस्कार तथा हवन-विधानका वर्णन
अध्याय 26
शिवलिङ्गमें अघोरार्चनकी विधि और उसका माहात्म्य
अध्याय 27
राजाओंको विजयप्राप्ति करानेवाले विजयमण्डलके निर्माण तथा पूजनकी विधि एवं जयाभिषेकका वर्णन; स्वायम्भुव मनु और विभिन्न देवताओंके जयाभिषेकका विवरण
अध्याय 28
स्वायम्भुव मनुके प्रति सनत्कुमारप्रोक्त षोडश महादान तुलापुरुषदानकी विधिका वर्णन
अध्याय 29
षोडशमहादानान्तर्गत हिरण्यगर्भदानकी विधि
अध्याय 30
तिलपर्वतदानकी विधि
अध्याय 31
सूक्ष्म तिलपर्वतदानकी विधि
अध्याय 32
सुवर्णपृथ्वीमहादानविधि
अध्याय 33
कल्पपादपदानविधि
अध्याय 34
गणेशेशदानविधि
अध्याय 35
सुवर्णधेनुदानविधि
अध्याय 36
ऐश्वर्यप्रद महालक्ष्मीदानविधि
अध्याय 37
तिलधेनुदानविधिनिरूपण
अध्याय 38
महादानोंमें परिगणित गोसहस्रदानकी विधि
अध्याय 39
हिरण्याश्वदानविधि
अध्याय 40
कन्यादानविधि
अध्याय 41
हिरण्यवृषमहादानविधि
अध्याय 42
सुवर्णगजदानविधि
अध्याय 43
लोकपालाष्टकमहादानविधि
अध्याय 44
त्रिमूर्तिदानविधि
अध्याय 45
जीवितावस्थामें किये जानेवाले जीवच्छाद्धका विधान
अध्याय 46
लिङ्गमें सभी देवताओंकी स्थितिका वर्णन और लिङ्गार्चनसे सभीके पूजनका फलनिरूपण
अध्याय 47
लिङ्गमूर्तिकी प्रतिष्ठाकी विधि
अध्याय 48
देवताओंकी प्रतिमाओंकी संक्षेपमें प्रतिष्ठा-विधि तथा विविध देवताओंके गायत्रीमन्त्र
अध्याय 49
अघोरेश्वररूप भगवान् शिवके निमित्त किये गये जप, हवन एवं पूजनका फल
अध्याय 50
विभिन्न कामनाओंके लिये अघोरमन्त्रसिद्धिका विधान
अध्याय 51
भगवान् शिवकी संहारिका शक्ति--वज्रेश्वरीविद्याके माहात्म्यमें वृत्रासुरकी उत्पत्तिकी कथा
अध्याय 52
वज्रेश्वरीविद्याकी सिद्धिका विधान
अध्याय 53
मृत्युंजयहवन-विधान
अध्याय 54
मृत्युहर त्रियम्बकमन्त्रका माहात्म्य तथा मन्त्रका व्याख्यान
अध्याय 55