ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · अरण्य काण्ड

अरण्य काण्ड चौपाई 3

अरण्य काण्ड · Aranya Kaand

मूल पाठ

प्रलंब बाहु विक्रमं। प्रभोऽप्रमेय वैभवं॥ निषंग चाप सायकं। धरं त्रिलोक नायकं॥3॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे प्रभो! आपकी लंबी भुजाओं का पराक्रम और आपका ऐश्वर्य अप्रमेय (बुद्धि के परे अथवा असीम) है। आप तरकस और धनुष-बाण धारण करने वाले तीनों लोकों के स्वामी,॥3॥

आगे पढ़ें — अरण्य काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस