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16 दिसंबर 2025

16 दिसंबर 2025 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

16 दिसंबर 2025 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
कृष्ण द्वादशी
नक्षत्र
स्वाति
योग
अतिगंड
करण
कौलव
वार
मंगलवार
हिन्दू मास
पौष
ऋतु
हेमन्त
सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
17:27

16 दिसंबर 2025 के लिए प्रश्नोत्तर

मंगलवार को लाल कपड़ा बांधने से क्या लाभ होता है?

मंगलवार मंगल ग्रह और हनुमान जी का दिन है। लाल कपड़ा बाँधने/पहनने से मंगल दोष शांति, साहस वृद्धि, हनुमान कृपा और बुरी शक्तियों से रक्षा होती है। हनुमान जी को लाल चोला चढ़ाना विशेष शुभ है।

हनुमान अष्टक पाठ का सही समय

हनुमान अष्टक का पाठ संध्या काल या रात्रि के समय करना सर्वाधिक प्रभावशाली होता है। संकट के समय मंगलवार या शनिवार की रात इसका पाठ अचूक फल देता है।

मंगलवार को हनुमान जी की पूजा कैसे करें?

स्नान→लाल/केसरिया वस्त्र→दीपक (सरसों तेल)→सिंदूर+तेल→केसरिया चोला→गुड़-चने भोग→हनुमान चालीसा (1-7 बार)→बजरंग बाण→आरती→प्रसाद। 'ॐ हं हनुमते नमः' 108 बार। मांसाहार वर्जित।

द्वादशी को संन्यासी श्राद्ध क्यों?

द्वादशी विष्णु-प्रिय और यतियों के योग्य है।

यति महालय क्या होता है?

संन्यासियों का द्वादशी श्राद्ध।

संन्यासी का श्राद्ध किस दिन करें?

द्वादशी तिथि को।

संन्यासी का श्राद्ध एकादशी को होता है क्या?

नहीं, संन्यासी श्राद्ध द्वादशी को।

संन्यासी का श्राद्ध किस तिथि को करें?

द्वादशी तिथि को।

संन्यासी का श्राद्ध दशमी को होता है क्या?

नहीं, संन्यासी का श्राद्ध द्वादशी को।

संन्यासी का श्राद्ध कब करें?

संन्यासी का श्राद्ध एकादशी या द्वादशी को होता है।

यति का श्राद्ध कब होता है?

यति (संन्यासी) का श्राद्ध — जिन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया था और सांसारिक बंधनों से मुक्त थे — पितृ पक्ष की 'द्वादशी' तिथि को होता है। यति और संन्यासी समानार्थी। यह उनकी विशिष्ट आध्यात्मिक कोटि के लिए शास्त्र-निर्धारित तिथि है।

संन्यासी का श्राद्ध किस तिथि को करें?

संन्यासी (यति) का श्राद्ध — जिन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया था और सांसारिक बंधनों से मुक्त थे — पितृ पक्ष की 'द्वादशी' तिथि को किया जाता है। यह उनकी विशिष्ट आध्यात्मिक कोटि के लिए शास्त्र-निर्धारित विशेष तिथि है।

संन्यासियों का श्राद्ध द्वादशी को क्यों किया जाता है?

संन्यासियों के श्राद्ध के लिए पितृ पक्ष की द्वादशी तिथि निर्धारित मानी गई है।

श्राद्ध द्वादशी को क्यों करना चाहिए?

एकादशी श्राद्ध वर्जित है, इसलिए श्राद्ध अगले दिन द्वादशी को किया जाना चाहिए।

एकादशी के दिन श्राद्ध क्यों नहीं करना चाहिए?

एकादशी श्राद्ध करने से कर्ता, पितर और पुरोहित तीनों को नरकगामी बताया गया है, इसलिए श्राद्ध द्वादशी को करना चाहिए।

माँ तारा की साधना कब करनी चाहिए?

तारा साधना का शुभ काल: माघ गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन (विशेष शुभ)। अर्धरात्रि = श्रेष्ठ फलदायी। किसी भी शुभ दिन, मंगलवार या शुक्ल पक्ष पंचमी से प्रारंभ।

एकादशी व्रत का पारण कब और कैसे करें?

एकादशी पारण: द्वादशी को प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में। पद्म पुराण: पारण में आँवला और बेर अवश्य खाएं — उच्छिष्ट दोष मिटता है। स्वतः गिरे तुलसी पत्ते का सेवन कर व्रत पूर्ण।

व्यापार वृद्धि के लिए बटुक भैरव साधना कैसे करें?

व्यापार वृद्धि के लिए: हर मंगलवार संकल्प पूर्वक कुत्तों को लड्डू खिलाएं, बटुक भैरव यंत्र स्थापित करें और नित्य एक माला जाप करें।

सभी पर्व
पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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