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8 फरवरी 2026

8 फरवरी 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

8 फरवरी 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
कृष्ण सप्तमी
नक्षत्र
स्वाति
योग
गंड
करण
विष्टि
वार
रविवार
हिन्दू मास
फाल्गुन
ऋतु
शिशिर
सूर्योदय
07:05
सूर्यास्त
18:06

आज के पर्व

सप्तमी

8 फरवरी 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

दुर्गा पूजा में सप्तमी अष्टमी नवमी का क्या विशेष महत्व है?

सप्तमी: नबपत्रिका, प्राण प्रतिष्ठा, नेत्रोन्मीलन। अष्टमी: संधि पूजा (108 दीपक), कुमारी पूजा = सर्वशक्तिशाली। नवमी: हवन/पूर्णाहुति, कन्या पूजन, वरदान।

रविवार को नमक क्यों नहीं देना चाहिए?

ज्योतिष के अनुसार रविवार सूर्य का दिन है और नमक सूर्य से जुड़ा है। रविवार को नमक देने से सूर्य कमजोर होता है — आत्मविश्वास में कमी और बरकत जाने की मान्यता है। यह लोक-मान्यता आधारित है।

गीता का सातवां अध्याय क्यों पढ़ें?

सप्तमी पर गीता का सातवाँ अध्याय विशेष फलदायी माना गया है।

कुतुप मुहूर्त क्या है?

कुतुप मुहूर्त श्राद्ध का श्रेष्ठ अष्टम मुहूर्त है।

नारद संहिता में सप्तमी का क्या महत्व है?

नारद संहिता सप्तमी को पितृकल्याण योग से जोड़ती है।

पितृकल्याण योग क्या है?

सप्तमी, अष्टमी और नवमी का पितृ पूजन पितृकल्याण योग है।

सप्तमातृका क्या हैं?

सप्तमातृका सात दिव्य माताएँ हैं।

सूर्य देव सप्तमी से कैसे जुड़े हैं?

सप्तमी सूर्य की तिथि मानी गई है।

तांत्रिक पूजा के लिए कौन सा दिन उत्तम है?

तांत्रिक पूजा के लिए शनिवार और रविवार सबसे उत्तम दिन हैं — निशिता काल (मध्यरात्रि) में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

रविवार को तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए क्यों?

रविवार को माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, इसलिए उस दिन पत्ते तोड़ना या जल चढ़ाना उनके व्रत को खंडित करना माना जाता है। विष्णु पुराण में यह स्पष्ट वर्जित है।

सूर्य ग्रह मजबूत करने रविवार उपाय

रविवार: अर्घ्य+आदित्य हृदय+'ॐ सूं सूर्याय नमः' 108+लाल वस्त्र+गुड़/गेहूं दान+माणिक+पिता सम्मान+गायत्री।

रविवार को लाल रंग पहनने का महत्व

रविवार = लाल/केसरिया (सूर्य)। तेज, अधिकार, स्वास्थ्य, नेतृत्व। सूर्य पूजा, अर्घ्य। माणिक रत्न। ज्योतिष परंपरा।

सूर्य ग्रह शांति पूजा कैसे करवाएं?

सूर्य शांति: प्रतिदिन ताम्बे से सूर्य अर्घ्य (सबसे सरल) → 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' 7000 जप → मदार समिधा से हवन → आदित्य हृदय स्तोत्र (सर्वश्रेष्ठ) → दान (गेहूँ, गुड़, ताँबा) → रविवार व्रत → सूर्य नमस्कार।

महाशिवरात्रि की पूजा कैसे करें?

महाशिवरात्रि में रात को चार प्रहर की पूजा करें — प्रथम प्रहर दूध, द्वितीय दही, तृतीय घी, चतुर्थ शहद से अभिषेक। प्रत्येक प्रहर बेलपत्र, 'ॐ नमः शिवाय' जप और आरती। पूरी रात जागरण। अगले दिन प्रातः पारण।

रविवार को सूर्य देव की पूजा कैसे करें?

सूर्योदय पर तांबे लोटे से अर्घ्य (जल+रोली+लाल फूल), 'ॐ सूर्याय नमः' 11 बार, आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्य नमस्कार। गुड़+गेहूँ दान। खड़े होकर अर्घ्य। लाभ: स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, सरकारी सफलता।

रविवार को कौन से काम शुभ?

रविवार=सूर्य(अधिकार/सरकार)। शुभ: सूर्य पूजा, सरकारी कार्य, पद, माणिक। गृहप्रवेश/विवाह कुछ में वर्जित। सूर्य नमस्कार।

दुर्गा पूजा में नबपत्रिका स्नान का क्या महत्व है?

9 पौधे = 9 देवी (केला/कचू/हल्दी/जयन्ती/बिल्व/अनार/अशोक/मानकचू/धान)। सप्तमी प्रातः स्नान, सफेद+लाल साड़ी = 'कला बऊ'। प्रकृति = देवी शक्ति। बंगाल विशेष।

सूर्य देव की पूजा विधि?

प्रातः तांबा लोटा जल+फूल+अक्षत→सूर्य ओर धारा→'ॐ सूर्याय' 7 बार। 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय' 108। आदित्य हृदय स्तोत्र। रविवार/छठ/संक्रांति। सरल: 1 लोटा जल=पर्याप्त।

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