ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
11 फरवरी 2026

11 फरवरी 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

11 फरवरी 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
कृष्ण नवमी
नक्षत्र
अनुराधा
योग
व्याघात
करण
गर
वार
बुधवार
हिन्दू मास
फाल्गुन
ऋतु
शिशिर
सूर्योदय
07:03
सूर्यास्त
18:08

11 फरवरी 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

दुर्गा पूजा में सप्तमी अष्टमी नवमी का क्या विशेष महत्व है?

सप्तमी: नबपत्रिका, प्राण प्रतिष्ठा, नेत्रोन्मीलन। अष्टमी: संधि पूजा (108 दीपक), कुमारी पूजा = सर्वशक्तिशाली। नवमी: हवन/पूर्णाहुति, कन्या पूजन, वरदान।

बुधवार को कौन से काम शुभ?

बुधवार=बुध(बुद्धि/व्यापार)। सभी कार्य शुभ — व्यापार, दुकान, बैंक, शिक्षा, लेखन, संचार, गृहप्रवेश। कोई विशेष वर्जना नहीं।

नवरात्रि में कन्या पूजन की विधि और कितनी कन्याओं की पूजा करें?

9 कन्या सर्वोत्तम (नवदुर्गा)। 7/5/2+1/1 भी मान्य। आयु 2-10 वर्ष। विधि: चरण धोएं → तिलक → चुनरी+श्रृंगार → हलवा-पूरी-चना+खीर → दक्षिणा → प्रणाम। अष्टमी/नवमी।

गणेश चालीसा पढ़ने की विधि और नियम क्या हैं?

विधि: स्नान → पूर्व/उत्तर मुख → दीपक → सिंदूर, दूर्वा, मोदक → 'ॐ गं गणपतये नमः' 3 बार → चालीसा → आरती। बुधवार/चतुर्थी विशेष। तुलसी वर्जित। 21/40 दिन निरंतर = विशेष फल। फल: विघ्न नाश, बुद्धि, सफलता।

बुधवार को गणेश पूजा करने का क्या विशेष विधान है?

बुधवार = बुद्धि दिवस, गणेश = बुद्धि देवता। विधान: पंचामृत अभिषेक, सिंदूर, 21 दूर्वा, मोदक, 108 जप, अथर्वशीर्ष/चालीसा, हरे मूंग प्रसाद। 21 बुधवार व्रत = मनोकामना पूर्ति। फल: बुद्धि, वाक्शक्ति, व्यापार लाभ, बुध शांति।

देवी की पूजा में अष्टमी और नवमी का क्या विशेष महत्व है?

अष्टमी: देवी शक्ति सर्वोच्च, संधि पूजा, हवन, रक्तबीज वध। नवमी: कन्या पूजन (9=9 देवी), पूर्णाहुति, वरदान अध्याय। दोनों = नवरात्रि चरमोत्कर्ष — 2 दिन = 9 दिन फल।

मातंगी देवी की साधना से वाक् सिद्धि कैसे प्राप्त होती है?

नवमी महाविद्या — वाक्/कला देवी। बीज: 'ॐ ह्रीं ऐं भगवती मतंगेश्वरी श्रीं स्वाहा'। वाक् सिद्धि = सम्मोहक वाणी। कवि/वक्ता/गायक/कलाकार। गृहस्थ सुख सर्वोत्तम। हरा रंग।

दुर्गा पूजा में संधि पूजा क्या होती है और कब की जाती है?

अष्टमी-नवमी संधिकाल (~24-48 मिनट)। चंड-मुंड/शुम्भ-निशुम्भ वध क्षण। 108 दीपक + 108 पुष्प + बलिदान (प्रतीकात्मक)। नवरात्रि सबसे शक्तिशाली पूजा।

सुहागिन स्त्री का श्राद्ध किस दिन करें?

मातृ नवमी को।

नवमी श्राद्ध न करने से क्या होता है?

मातृ-दोष और बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।

नवमी श्राद्ध से पितृ दोष मिटता है क्या?

हाँ, पितृ दोष शांति में सहायक है।

नवमी श्राद्ध में कौन से पिण्ड चढ़ते हैं?

मातृ-पितरों के पिण्ड।

नवमी श्राद्ध में तर्पण कैसे करें?

तिल-कुश-जल से दक्षिणमुख तर्पण।

नवमी श्राद्ध में श्राद्धकर्ता कैसे बैठे?

कुशा, रेशम या ऊन के आसन पर।

नवमी श्राद्ध का अधिकारी कौन है?

पुत्र सहित योग्य परिजन।

कन्या की मृत्यु पर नवमी श्राद्ध होता है क्या?

अविवाहित कन्या के लिए सामान्यतः नहीं।

अविधवा स्त्री की अकाल मृत्यु हो तो श्राद्ध कब?

अविधवा नवमी को।

अविधवा का अर्थ क्या है?

पति के जीवित रहते दिवंगत सुहागिन स्त्री।

सभी पर्व
पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

शहर अनुसार पंचांग
अपने नगर का पंचांग देखें

3,000+ नगरों का सटीक पंचांग, मुहूर्त और राहु काल।