भगवान विष्णु / गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र स्तोत्र मंत्र
यस्य ब्रह्मादयो देवा वेदा लोकाश्चराचराः । नामरूपविभेदेन फल्ग्व्या च कलया कृताः ॥ 4
कलियुग के समस्त पापों का नाश, दुःस्वप्न निवारण, जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति और श्रेय की प्राप्ति 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कलियुग के समस्त पापों का नाश, दुःस्वप्न निवारण, जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति और श्रेय की प्राप्ति 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
कलियुग के समस्त पापों का नाश, दुःस्वप्न निवारण, जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति और श्रेय की प्राप्ति
जाप विधि
हृदय में बुद्धि और ध्यान को एकाग्र करके इस स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करें 4।
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ॐ ह्रीं क्रूं क्रूररूपिणे केतवे ऐं सौः स्वाहा॥
mool mantraॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः शिवाय
tantrik mantraॐ ह्रीं ऐं क्लीं श्री बगलाने मम रिपून नाशय नाशय ममैश्वर्याणि देहि देहि शीघ्रं मनोवांछितं साधय साधय ह्रीं स्वाहा
kaamya mantraत्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया। सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः॥
bhakti mantraॐ जय हरि विट्ठल नमो नमः पंढरीनाथा नमो नमः
sabar mantraओम नमो भूत प्रेत पिशाच दुष्ट दृष्टि विनाशाय ओम क्लीम स्वाहा 27