हवन विधिहिरण्यगर्भ सूक्त मंत्र का क्या अर्थ है?
हिरण्यगर्भ सूक्त का अर्थ: जो स्वप्रकाशस्वरूप, सृष्टि के पूर्व भी विद्यमान, सम्पूर्ण जगत का एकमात्र स्वामी और पृथ्वी से द्युलोक तक को धारण करने वाले हैं — उस सुखस्वरूप परमात्मा की हविष्य (प्रेम और भक्ति) से उपासना करें।
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