रत्न शास्त्रलहसुनिया रत्न केतु शांति में कैसे सहायक?लहसुनिया=केतु। रोग मुक्ति, दुर्घटना रक्षा, धनलाभ। अनामिका, चांदी, शनिवार, 'ॐ कें केतवे नमः'। ~1 माह। ज्योतिषी सलाह।
ज्योतिषकेतु मंत्र का जप केतु दोष शांति के लिए कैसे करें?बीज: 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः' 17,000। सरल: 'ॐ कें केतवे नमः' 108। मंगलवार/शनिवार, भूरे वस्त्र, 7 मुखी रुद्राक्ष। गणेश पूजा। केतु = मोक्षकारक भी। ज्योतिषी परामर्श।#केतु#मंत्र#दोष
लोकराहु केतु कैसे बने?स्वर्भानु का सिर राहु और धड़ केतु बना, क्योंकि अमृत पीने के बाद विष्णु ने उसे काट दिया।#राहु केतु#स्वर्भानु#सुदर्शन चक्र
नवग्रहों का देव स्वरूपराहु और केतु अमर कैसे हो गए?स्वरभानु असुर ने अमृत पान किया था — विष्णु के सुदर्शन चक्र से सिर-धड़ अलग होने पर भी अमृत के प्रभाव से सिर (राहु) और धड़ (केतु) दोनों अमर हो गए।#राहु केतु अमर#अमृत प्रभाव#सुदर्शन चक्र
नवग्रहों का देव स्वरूपराहु और केतु की उत्पत्ति कैसे हुई?समुद्र मंथन में स्वरभानु असुर ने देव वेष में अमृत पान किया — सूर्य-चंद्र ने रहस्य उजागर किया, विष्णु के सुदर्शन चक्र से सिर (राहु) और धड़ (केतु) अलग हुए और अमृत के कारण दोनों अमर हो नवग्रह बने।#राहु केतु उत्पत्ति#स्वरभानु#समुद्र मंथन
ग्रह दोष निवारणकालसर्प दोष के लिए बटुक भैरव साधना कैसे करें?कालसर्प दोष के लिए कालाष्टमी पर भैरव के सामने दीपक जलाकर मंत्र जपें: 'ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय। कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा।'#कालसर्प दोष#राहु#केतु
ज्योतिष दोष एवं उपायकेतु दोष क्या है लक्षण कैसे पहचानेंकेतु=वैराग्य/अचानक। लक्षण: अज्ञात समस्या, संतान कष्ट, त्वचा रोग, अत्यधिक वैराग्य, कुत्ते भय, दुर्घटना। ज्योतिषी=सटीक पहचान।#केतु#दोष#लक्षण
ज्योतिष दोष एवं उपायराहु केतु दोष से कैसे बचेंराहु: दुर्गा पूजा, 'ॐ रां राहवे नमः', गोमेद, 8 मुखी रुद्राक्ष। केतु: गणेश पूजा, 'ॐ कें केतवे नमः', लहसुनिया, 9 मुखी। सार्वभौमिक: महामृत्युंजय + हनुमान + शिव।#राहु#केतु#दोष
शिव पूजाशिव की पूजा में राहु केतु दोष निवारण कैसे करें?राहु: महामृत्युंजय सवा लाख जप+हवन, शिवलिंग पर काले तिल, काल भैरव पूजा। केतु: कुश से जलाभिषेक, गणेश पूजा, सप्तधान्य अर्पण। दोनों: रुद्राभिषेक, प्रदोष व्रत, 8/9 मुखी रुद्राक्ष, काल सर्प दोष हेतु त्र्यम्बकेश्वर/महाकाल पूजा। ज्योतिषी से कुंडली परामर्श उचित।#राहु केतु#ग्रह दोष#निवारण