शिव-सती-पार्वती कथाशिव-पार्वती का विवाह किस तिथि को हुआ थाशिव-पार्वती का विवाह फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को हुआ — यही महाशिवरात्रि है। इसीलिए महाशिवरात्रि मनाने का एक प्रमुख कारण यह दिव्य विवाह-उत्सव है।#शिव पार्वती विवाह तिथि#महाशिवरात्रि#फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी
शिव पूजा विधिशिव परिवार की पूजा कैसे करें और इसका क्या लाभ है?शिवलिंग = पूरे परिवार का प्रतीक। क्रम: गणेश→पार्वती→कार्तिकेय→शिव→नंदी। लाभ: पारिवारिक एकता, बुद्धि (गणेश), सौभाग्य (पार्वती), साहस (कार्तिकेय), कल्याण (शिव)। संतान सुख। शिक्षा: विरोधी वाहन फिर भी एकसाथ = एकता।#शिव परिवार#पार्वती#गणेश
प्रमुख मंदिरवाराणसी को माँ शैलपुत्री का स्थायी लोक क्यों माना जाता है?वाराणसी = माँ शैलपुत्री का स्थायी लोक क्यों: जन्म के बाद पहली बार देवी काशी आईं और यहीं स्वयं विराजमान हो गईं। इसलिए वाराणसी = उनका स्थायी लोक। नवरात्रि में विशेष पूजा।#वाराणसी स्थायी लोक#काशी#देवी प्रथम आगमन
नीलकंठ स्वरूप और कालकूट विषपानविषपान के समय पार्वती ने क्या किया?विषपान के समय देवी पार्वती ने शिव का कंठ दबा दिया ताकि विष शरीर में न जाए — इससे विष कंठ में रुक गया और शिव नीलकंठ कहलाए।#पार्वती#विषपान#कंठ
दैनिक आचारखाना बनाते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' या 'ॐ अन्नपूर्णायै नमः'। शांत मन, स्वच्छ, सकारात्मक भाव से बनाएं। क्रोध/नकारात्मकता में न बनाएं — भोजन भाव ग्रहण करता है।#खाना बनाना#रसोई#मंत्र