विस्तृत उत्तर
रसोई में भोजन बनाते समय ईश्वर स्मरण से भोजन सात्विक और पवित्र बनता है।
मंत्र
- 1अन्नपूर्णा स्तोत्र: 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राणवल्लभे। ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति।।'
— हे अन्नपूर्णा (पार्वती), सदा पूर्ण, शंकर प्रिये — ज्ञान और वैराग्य प्रदान करो।
- 1सरल: 'ॐ अन्नपूर्णायै नमः'
- 1गायत्री मंत्र या कोई भी इष्ट मंत्र।
व्यावहारिक सुझाव
- ▸शांत मन से, स्वच्छ होकर, सकारात्मक विचारों से भोजन बनाएं।
- ▸क्रोध, दुःख, नकारात्मकता में भोजन बनाना अनुचित — भोजन भाव ग्रहण करता है (ऐसी आध्यात्मिक मान्यता है)।





