दैनिक आचारखाना बनाते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' या 'ॐ अन्नपूर्णायै नमः'। शांत मन, स्वच्छ, सकारात्मक भाव से बनाएं। क्रोध/नकारात्मकता में न बनाएं — भोजन भाव ग्रहण करता है।#खाना बनाना#रसोई#मंत्र
वास्तु शास्त्रवास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई में गैस किस दिशा में रखेंगैस/चूल्हा आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में रखें और खाना बनाते समय मुख पूर्व दिशा की ओर हो। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में गैस रखना सबसे बड़ा दोष है। सिंक और गैस साथ-साथ न रखें।#रसोई#गैस
संस्कार विधिगृह प्रवेश पूजा में दूध उबालने का क्या विधान है?दूध उबालना: दूध=समृद्धि/पवित्रता, उफनना=प्रचुरता ('सुख बाहर बहे'), रसोई शुद्धि (अन्नपूर्णा आह्वान), खीर=प्रथम प्रसाद। उफनने दें (शुभ), रोकें नहीं। नई रसोई का प्रथम कार्य।#गृह प्रवेश#दूध उबालना#शुभ
प्रसिद्ध मंदिरजगन्नाथ मंदिर में भोग प्रसाद बनाने की विशेष विधि क्या है?जगन्नाथ रसोई: 752 चूल्हे, 500 रसोइये। विशेषता: 7 मिट्टी के हांडे एक पर एक — ऊपर वाला पहले पकता है। केवल लकड़ी ईंधन। 56 भोग विशेष अवसरों पर। शाकाहारी, प्याज-लहसुन वर्जित। महाप्रसाद = सर्वोच्च पवित्र — जाति-भेद रहित भोजन। प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता।#जगन्नाथ पुरी#महाप्रसाद#अबड़ा
वास्तु शास्त्रवास्तु के हिसाब से रसोई में फ्रिज कहां रखेंफ्रिज दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में रखें, दरवाजा पूर्व दिशा में खुले। ईशान कोण और दक्षिण दिशा में बिल्कुल न रखें। दीवार से एक फीट दूर रखें।#वास्तु#फ्रिज#रसोई