नित्य कर्मअन्नपूर्णा मंत्र भोजन से पहलेभोजन से पूर्व 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' मंत्र का उच्चारण करने से अन्न के दोष नष्ट होते हैं, भोजन प्रसाद बन जाता है और घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती।#अन्नपूर्णा#भोजन#कृतज्ञता
देवी पूजन और आवाहनमाँ शैलपुत्री का मंत्र क्या है?माँ शैलपुत्री का आवाहन मंत्र: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नमः।' बीज मंत्र: 'ह्रीं श्रीं शैलपुत्र्यै नमः'#शैलपुत्री मंत्र#नवार्ण मंत्र#बीज मंत्र
मंत्र और स्तुतिमाँ पार्वती के पंचाक्षर और अष्टाक्षर मंत्र क्या हैं?पंचाक्षर: 'ॐ पार्वत्यै नमः'; अष्टाक्षर: 'ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः' — दोनों अत्यंत कल्याणकारी। महामृत्युंजय मंत्र (ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...) भी शिव-शक्ति की संयुक्त उपासना का रूप है।#पंचाक्षर मंत्र#अष्टाक्षर मंत्र#ॐ पार्वत्यै
गौरी बीज मंत्रगौरी बीज मंत्र क्या है?गौरी बीज मंत्र है: 'ॐ ह्रीं गौरये नमः' — यह शाक्त आगम का शक्तिशाली मंत्र है जो देवी गौरी पार्वती की आराधना और विवाह बाधा निवारण के लिए प्रयोग होता है।#गौरी बीज मंत्र#ॐ ह्रीं गौरये नमः#शाक्त आगम
गौरी वंदना मंत्रगौरी वंदना मंत्र विवाह के लिए कैसे उपयोगी है?गौरी वंदना मंत्र विवाह के लिए परम प्रमाण है — यह केवल विवाह की याचना नहीं बल्कि शिव-पार्वती के समान अटल दांपत्य-सौभाग्य और उच्च कोटि के जीवनसाथी की कामना करता है।#गौरी वंदना#विवाह#मनोवांछित जीवनसाथी
गौरी वंदना मंत्रगौरी वंदना मंत्र का सरल अर्थ क्या है?गौरी वंदना मंत्र का अर्थ: 'हे गौरी! जिस प्रकार आप शंकर को प्रिय हैं, उसी प्रकार मुझे भी मेरा मनोवांछित और अत्यंत दुर्लभ पति/पत्नी प्रदान कीजिए।'#गौरी वंदना अर्थ#मनोवांछित पति पत्नी#कल्याणी
गौरी वंदना मंत्रगौरी वंदना मंत्र किस ग्रंथ से लिया गया है?गौरी वंदना मंत्र गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस के बालकाण्ड में सीता के गौरी वंदना प्रसंग से लिया गया है।#रामचरितमानस#बालकाण्ड#तुलसीदास
गौरी वंदना मंत्रगौरी वंदना मंत्र क्या है?गौरी वंदना मंत्र: 'हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्।।' — यह रामचरितमानस के बालकाण्ड से है।#गौरी वंदना मंत्र#रामचरितमानस#विवाह मंत्र
रामचरितमानस — बालकाण्डशिव-पार्वती विवाह में वेद मंत्रों से किसने विवाह करवाया?महामुनियों (श्रेष्ठ मुनिगणों) ने वेद मंत्रों की रीति से विवाह करवाया। हिमाचल ने हाथ में कुश लेकर कन्या का हाथ पकड़कर उन्हें भवानी जानकर शिवजी को समर्पित किया। पहले गणेशजी का पूजन किया गया।#बालकाण्ड#शिव पार्वती विवाह#वेद मंत्र
गृह आचार एवं पूजा विधिभोजन के पहले और बाद में कौन से मंत्र बोलने चाहिए?भोजन से पहले 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे' और 'ब्रह्मार्पणम्' श्लोक बोलें। भोजन के बाद पाचन हेतु 'अगस्त्यं कुम्भकर्णं च' मंत्र बोलें। भोजन से पहले हाथ-पाँव-मुँह धोना जरूरी है।#भोजन मंत्र#अन्नपूर्णा#ब्रह्मार्पणम
शिवशीघ्र विवाह के लिए भगवान शिव का कौन सा मंत्र जपना चाहिएविवाह हेतु 'ॐ साम्ब सदाशिवाय नमः' मंत्र और सोमवार के दिन शिव-पार्वती की विधिवत पूजा फलदायी होती है।#विवाह#शिव मंत्र#पार्वती
दैनिक आचारखाना बनाते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' या 'ॐ अन्नपूर्णायै नमः'। शांत मन, स्वच्छ, सकारात्मक भाव से बनाएं। क्रोध/नकारात्मकता में न बनाएं — भोजन भाव ग्रहण करता है।#खाना बनाना#रसोई#मंत्र
नित्य मंत्रभोजन के बाद कौन सा मंत्र बोलें?भोजन पूर्व: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः...' (गीता 4.24) + पंचप्राण आहुति। भोजन बाद: 'अन्नदाता सुखी भव' + 'ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा' (जल सहित) + आचमन। पूर्व/उत्तर मुख, मौन भोजन श्रेष्ठ।#भोजन मंत्र#अन्नपूर्णा#भोजनोत्तर
दैनिक कर्मभोजन से पहले कौन सा मंत्र बोलना चाहिएभोजन से पहले: (1) गीता 4.24: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्' (2) उपनिषद: 'ॐ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु' (3) 'अन्नब्रह्मा रसो विष्णुः भोक्ता देवो महेश्वरः' (4) अन्नपूर्णा स्तोत्र। पूर्व/उत्तर दिशा में मुख कर भूमि पर बैठकर भोजन करें।#भोजन मंत्र#ब्रह्मार्पणम्#अन्नपूर्णा
नवदुर्गाशैलपुत्री की पूजा विधि और मंत्र क्या है?नवरात्रि दिन 1। हिमालय पुत्री, वृषभ वाहन, त्रिशूल+कमल। मंत्र: 'ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः'। भोग: शुद्ध घी। रंग: पीला। मूलाधार चक्र। कथा: सती → पुनर्जन्म → हिमालय पुत्री → शिव विवाह।#शैलपुत्री#प्रथम#नवरात्रि