ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
टैग

आध्यात्मिक अर्थ से जुड़े सभी प्रश्न(9)

आध्यात्मिक अर्थ पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 9 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

अविवाहित मृत्यु का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

गृहस्थ आश्रम से पहले मृत्यु को अविवाहित मृत्यु की अपूर्ण अवस्था माना गया है।

#अविवाहित मृत्यु#आध्यात्मिक अर्थ#गृहस्थ आश्रम
कालसर्प दोष: परिचय और कारण

केतु का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

केतु अतीत के कर्म-बंधन, मोक्ष की छटपटाहट और वैराग्य का प्रतीक है।

#केतु#आध्यात्मिक अर्थ#कर्म बंधन
कालसर्प दोष: परिचय और कारण

राहु का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

राहु अतृप्त इच्छाओं (वासना), भ्रम और भविष्य की असीमित भौतिक आकांक्षाओं का प्रतीक है।

#राहु#आध्यात्मिक अर्थ#वासना
कालसर्प दोष: परिचय और कारण

कालसर्प दोष का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

कालसर्प दोष का आध्यात्मिक अर्थ है — 'काल' (शिव) द्वारा 'सर्प' (नाग) के माध्यम से दिया गया एक कार्मिक दण्ड या संतुलन-चक्र, जो पूर्वजन्म के कर्मों या पितृ-शाप से जुड़ा होता है।

#कालसर्प दोष#आध्यात्मिक अर्थ#कार्मिक बंधन
दार्शनिक आधार

वरूथिनी एकादशी का क्या अर्थ है?

'वरूथिनी' का मतलब होता है 'कवच' या रक्षा करने वाला। यह एकादशी हमारे चारों तरफ एक ऐसा सुरक्षा चक्र बना देती है जो हमें हर तरह के पापों, बीमारियों, नकारात्मक शक्तियों और पुराने कर्मों के बुरे फल से बचाती है।

#वरूथिनी एकादशी#कवच#आध्यात्मिक अर्थ
व्रत का महत्व

प्रदोष काल का आध्यात्मिक और दार्शनिक अर्थ क्या है?

#प्रदोष काल#आध्यात्मिक अर्थ#शिव तांडव
पूजा एवं अनुष्ठान

पूजा में दीपक जलाने का आध्यात्मिक अर्थ

दीपक परब्रह्म का प्रतीक है। तेल अहंकार का, बाती जीवात्मा का और लौ परमात्मा की ज्योति का प्रतीक है। दीपक जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और दिव्य तरंगें उत्पन्न होती हैं।

#दीपक#आरती#आध्यात्मिक अर्थ
पौराणिक कथा

समुद्र मंथन की कथा का आध्यात्मिक अर्थ

क्षीरसागर = मन; मंदराचल = साधना; वासुकि = प्राण; देव-असुर = शुभ-अशुभ गुण; कूर्म = ईश्वर कृपा; हालाहल = साधना में उभरे विकार (शिव/ज्ञान ग्रहण करे); अमृत = आत्मज्ञान/मोक्ष। शिक्षा: विष (कठिनाई) अमृत (ज्ञान) से पहले आता है।

#समुद्र मंथन#आध्यात्मिक अर्थ#प्रतीक
शक्ति उपासना

देवी की उपासना में पंचमकार का वास्तविक आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

पंचमकार का आध्यात्मिक अर्थ: मद्य = सहस्रार का सोम रस। मांस = जिह्वा/अहंकार संयम। मत्स्य = इड़ा-पिंगला प्राणायाम। मुद्रा = योग आसन/हस्त मुद्रा। मैथुन = कुण्डलिनी-शिव मिलन (आंतरिक योग)। गोरखनाथ: शरीर में ही शिव-शक्ति मिलन = बाह्य आवश्यकता नहीं। यथार्थ प्रयोग = केवल गुरु दीक्षा से।

#पंचमकार#तंत्र#आध्यात्मिक अर्थ
सम्पूर्ण प्रश्नोत्तरी
सभी प्रश्न देखें

10,000+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — श्रेणी, हब और टैग में सजे।

टैग खोज
अन्य टैग देखें

पूजा, मंत्र, साधना, उपाय, ज्योतिष — विषय अनुसार छाँटे गए सभी टैग।