श्राद्ध विधिपितृपक्ष में क्या नहीं करना चाहिए — विस्तार से?न करें: नया कार्य, विवाह, मुंडन, मांसाहार, प्याज-लहसुन, लोहे बर्तन, बाल कटवाना, नए वस्त्र। करें: तर्पण, सात्विक भोजन, गो-सेवा, दान, गीता/गरुड़ पुराण पाठ।#पितृपक्ष निषेध#नियम#क्या न करें
लोकधनतेरस पर क्या नहीं करना चाहिए?धनतेरस पर गंदगी, अहंकार, लोभ और दूसरों के श्रम का अपमान नहीं करना चाहिए।#धनतेरस#क्या न करें#लक्ष्मी
तंत्र वर्जनतंत्र साधना के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?तंत्र में न करें: साधना बीच में न छोड़ें, प्रदर्शन नहीं, भय नहीं, अहंकार नहीं, दुरुपयोग (हानि/वशीकरण) नहीं, तामसिक आहार नहीं, क्रोध-लोभ से नहीं। कुलार्णव: 'स्वेच्छाचारी साधक नष्ट होता है।'#वर्जन#क्या न करें#नियम
जप वर्जनमंत्र जप के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?जप में न करें: बात, भोजन, नींद, इधर-उधर देखना। माला में: तर्जनी से न छुएं, सुमेरु न लाँघें, भूमि पर न रखें। क्रोध या प्रदर्शन के लिए जप नहीं। कुलार्णव: जप गोपनीय रखें। मंत्र महोदधि: 'जप काल में भाषण, भोजन, निद्रा त्यागें।'#वर्जन#क्या न करें#नियम
पूजा नियमपूजा करते समय क्या नहीं करना चाहिए?पूजा में वर्जित: बिना स्नान, मैले वस्त्र, जूते-चप्पल, बासी फूल, खंडित फूल, दक्षिण मुख, पूजा बीच में छोड़ना, देवता की पीठ की ओर बैठना। पूजा के समय बात न करें, मोबाइल दूर रखें। प्रत्येक देवता के वर्जित फूल अलग हैं — शिव को केतकी, गणेश को तुलसी वर्जित।#पूजा वर्जन#पूजा नियम#क्या न करें