पूजा विधि एवं कर्मकांडकृष्ण जी की पूजा का सबसे उत्तम दिन कौन सा हैकृष्ण पूजा के लिए बुधवार सबसे शुभ दिन है, क्योंकि यह कृष्ण से जुड़ी परंपरा का प्रमुख दिन है। रोहिणी नक्षत्र भी विशेष शुभ है। जन्माष्टमी (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) वर्ष की सर्वोत्तम कृष्ण-पूजा का अवसर है।#कृष्ण पूजा दिन#बुधवार कृष्ण#जन्माष्टमी
त्योहार पूजाजन्माष्टमी पर कंस वध की लीला का आध्यात्मिक संदेश क्या है?कंस वध: कंस=अहंकार/भय, कृष्ण=सत्य। गीता 4.7-8 (अवतार)। अत्याचार अंत निश्चित। प्रेम>भय। आंतरिक कंस (लोभ-मोह)=विवेक से नष्ट।
त्योहार पूजाजन्माष्टमी पर दही हांडी की परंपरा का पौराणिक आधार क्या है?दही हांडी आधार: भागवत दशम स्कन्ध — बालकृष्ण+ग्वाल=गोपियों का माखन चुराना। ऊँची मटकी=गोपी रक्षा, मानव पिरामिड=ग्वाल, शीर्ष=कृष्ण (गोविन्दा)। पुनराभिनय। महाराष्ट्र=भव्य। 'गोविन्दा आला रे!'#दही हांडी#जन्माष्टमी#कृष्ण
त्योहार पूजाजन्माष्टमी पर कृष्ण जन्म की पूजा कैसे करें?जन्माष्टमी: निर्जला व्रत → झूला सजाएँ → मध्यरात्रि 12 बजे बालकृष्ण पंचामृत अभिषेक → वस्त्र-मुकुट-मोरपंख → माखन-मिश्री भोग → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' → कृष्ण जन्म कथा → आरती → झूला → प्रसाद से व्रत पारण।#जन्माष्टमी#कृष्ण जन्म#भाद्रपद कृष्ण अष्टमी
पूजा विधानलड्डू गोपाल पूजा का विशेष विधान क्या है?लड्डू गोपाल को बालक मानकर सेवा करें। प्रातः पंचामृत स्नान, मौसमी वस्त्र, मोरपंख मुकुट, बाँसुरी, माखन-मिश्री-तुलसी का भोग, दिन में दो बार भोग, रात्रि में शयन सेवा। तुलसी अनिवार्य है।#लड्डू गोपाल#बाल कृष्ण#पूजा विधि