पूजा विधि एवं कर्मकांडपूजा में ताम्बूल अर्पित करने का विधानताम्बूल षोडशोपचार का चौदहवाँ उपचार है — पान पर सुपारी, लौंग, इलायची और दक्षिणा रखकर अर्पित करें। मंत्र है — 'ॐ लवंगैलादिसंयुक्तं ताम्बूलं दक्षिणां तथा...'। इससे भोगों की प्राप्ति होती है।#ताम्बूल#पान सुपारी#षोडशोपचार
पूजा विधि एवं कर्मकांडपूजा में इलायची रखने का महत्वइलायची षोडशोपचार के ताम्बूल उपचार का अनिवार्य अंग है — 'लवंगैलादि-संयुक्तं ताम्बूलम्' में 'एला' का अर्थ इलायची ही है। इसकी श्रेष्ठ सुगंध देवता को प्रसन्न करती है और लौंग के साथ इसका अर्पण शिव-शक्ति के संयोग का प्रतीक है।#इलायची
पूजा विधि एवं कर्मकांडपूजा में लौंग रखने का अर्थलौंग ताम्बूल उपचार का अनिवार्य अंग है — पान में सुपारी और इलायची के साथ यह भगवान को अर्पित की जाती है। यह वातावरण को शुद्ध करने वाली और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट करने वाली मानी जाती है। हनुमानजी को लौंग-इलायची युक्त पान का बीड़ा अर्पित करना विशेष फलदायी है।#लौंग#पूजा सामग्री#लौंग महत्व
पूजा विधि एवं कर्मकांडपूजा में पान का महत्वपान को षोडशोपचार में ताम्बूल के रूप में भगवान को समर्पित किया जाता है जिससे भोगों की प्राप्ति होती है। पत्ते के विभिन्न भागों में इन्द्र, सरस्वती, लक्ष्मी और विष्णु का वास माना जाता है। पान, सुपारी, लौंग और दक्षिणा के साथ यह पूजा का पूर्ण उपचार है।#पान#पान महत्व#ताम्बूल
लोकत्रयोदशी श्राद्ध में ब्राह्मण को कैसे विदा करें?दक्षिणा-ताम्बूल देकर सम्मान से।#ब्राह्मण विदाई#दक्षिणा#ताम्बूल
उत्तर-पूजनशिव पूजा में क्या-क्या भोग लगाते हैं?शिव को भोग: ऋतुफल, मिठाई, दूध की खीर, भांग का भोग। मुख शुद्धि: ताम्बूल (पान, लौंग, इलायची, सुपारी) — यश-कीर्ति देता है। शिव को प्रिय पुष्प: श्वेत पुष्प, मदार, कनेर, धतूरा।#शिव नैवेद्य#भांग#खीर