कार्तिकेय कथाकार्तिकेय को मुरुगन और सुब्रमण्यम किस क्षेत्र में कहते हैं?कार्तिकेय को 'मुरुगन' और 'सुब्रमण्यम' दक्षिण भारत में — विशेषतः तमिलनाडु में — कहा जाता है। तमिल परंपरा में मुरुगन सर्वाधिक लोकप्रिय देवता हैं और 'तमिल कडवुल' (तमिलों के देवता) कहे जाते हैं।#मुरुगन#सुब्रमण्यम#दक्षिण भारत
लोक परंपरादक्षिण भारत (कर्नाटक/तमिलनाडु) में रथ सप्तमी कैसे मनाते हैं?वहां आंगन में सूर्य-रथ की रंगोली बनाकर गाय के गोबर पर मिट्टी के बर्तन में दूध उबाला जाता है। उबलते दूध को शुभ माना जाता है और उसी से 'मीठा पोंगल' (परमान्न) बनाकर सूर्य को भोग लगाते हैं।
पूजा पद्धतिवैखानस और पांचरात्र पूजा पद्धति में क्या अंतर है?वैखानस: वैदिक, विखनस मुनि, जन्मतः अधिकार, यज्ञ-प्रधान, तिरुपति। पांचरात्र: आगमिक, नारायण, पंचसंस्कार दीक्षा, मंत्र-न्यास-मुद्रा, श्रीरंगम। मुख्य भेद: वैदिक vs आगमिक मंत्र, जन्म vs दीक्षा अधिकार।#वैखानस#पांचरात्र#वैष्णव
षोडश संस्कारविवाह संस्कार में मंगलसूत्र बांधने का क्या विधान हैमंगलसूत्र बांधना: दक्षिण भारत में सबसे महत्वपूर्ण विवाह क्षण — वर तीन गाँठें बांधता है (ब्रह्मा-विष्णु-शिव प्रतीक)। महाराष्ट्र में भी प्रमुख। उत्तर भारत में सप्तपदी/सिन्दूरदान अधिक केन्द्रीय। सौभाग्य, अटूट बन्धन का प्रतीक। प्राचीन गृह्यसूत्रों में स्पष्ट उल्लेख नहीं — कालान्तर की महत्वपूर्ण लोकपरम्परा।#विवाह#मंगलसूत्र#सौभाग्य
पूजा पद्धतिदक्षिण भारत में आगम पद्धति से पूजा कैसे होती हैदक्षिण भारत में तीन मुख्य आगम: वैखानस (तिरुपति जैसे विष्णु मन्दिर), पाञ्चरात्र (श्रीरंगम जैसे विष्णु मन्दिर), शैवसिद्धान्त (शिव मन्दिर)। दिन में 6 काल पूजा — अभिषेक, अलंकार, नैवेद्य, दीपाराधना। आगम शिक्षित पुरोहित ही पूजा करते हैं। मन्दिर निर्माण से लेकर उत्सव तक सब आगम अनुसार।#दक्षिण भारत#आगम#मन्दिर पूजा