विस्तृत उत्तर
कर्नाटक और तमिलनाडु में इस पर्व की अत्यंत समृद्ध लोक-परंपरा है। प्रातःकाल घर के आँगन में सूर्य-रथ की सुंदर रंगोली (कोलम) बनाई जाती है, जिसमें सात घोड़े दर्शाए जाते हैं। उस रथ के बीच में गाय के गोबर का कंडा जलाकर एक मिट्टी के बर्तन में दूध उबाला जाता है। जब वह दूध उबलकर किनारों से बाहर गिरने लगता है (Spilling over), तो उसे धन-धान्य और समृद्धि के छलकने का शुभ-शकुन माना जाता है। फिर उसी दूध में नवीन चावल और गुड़ मिलाकर 'परमान्न' (मीठा पोंगल) तैयार कर सूर्य को भोग लगाते हैं।





