श्रीमद्भागवतपुत्र मोह क्यों छोड़ना चाहिए?गोकर्ण कहते हैं कि पुत्र-मोह अज्ञान है, मोह से नरक की प्राप्ति होती है और शरीर भी नश्वर है।#पुत्र मोह#गोकर्ण#आत्मदेव
श्रीमद्भागवतआत्मदेव ने संन्यास क्यों नहीं माना?आत्मदेव ने संन्यास को नीरस कहा और पुत्र-पौत्र से भरे गृहस्थ जीवन को सरस मानकर पुत्र मांगने का हठ किया।#आत्मदेव#संन्यास#गृहस्थ
रामचरितमानस — बालकाण्डराजा दशरथ ने श्रीरामजी को देने में क्या आपत्ति जताई?दशरथ का हृदय काँपा — 'सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाई। राम देत नहिं बनइ गोसाई' — सब पुत्र प्राण समान हैं, राम को देना सम्भव नहीं। कहाँ भयानक राक्षस और कहाँ मेरा सुकुमार किशोर पुत्र!#बालकाण्ड#दशरथ#पुत्र मोह